लखनऊ, 1 मार्च । आदि देव शिव और शक्ति की देवी गौरी के विवाह के प्रतीक पर्व महाशिवरात्रि के मौके पर उत्तर प्रदेश में चहुंओर आस्था का समंदर हिलोंरे मारता दिखा। शिव की नगरी काशी और संगम नगरी प्रयागराज समेत राज्य के अधिसंख्य इलाकों में कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच तड़के से ही शिवालयों में जलाभिषेक और दर्शन पूजन करने के लिये श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
देश के 12 ज्योर्तिलिंगों में एक बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में देर रात से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। ‘ हर हर बम बम’ के गगनभेदी उदघोष के साथ श्रद्धालु गंगा नदी में स्नान कर अपने आराध्य के दर्शन के लिये कतारबद्ध होने लगे थे। दूर दराज के क्षेत्रों से पवित्र नदियों और सरोवरों का जल लेकर आये कांवड़ियों के समूह उत्साह और बेसब्री के जलाभिषेक के लिये अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
वाराणसी से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार काशी विश्वनाथ धाम में भगवान विश्वेषर के दर्शन पूजन के लिये हजारों शिवभक्तों ने हर हर महादेव के उदघाेष के साथ विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक किया। पिछले वर्ष दिसम्बर में काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के बाद पहली शिवरात्रि के मौके पर नगर और आसपास के सैकड़ों भक्तों ने कल रात से ही मणिकर्णिका घाट स्थित धर्म स्थलों पर पूजा दर्शन और गंगा स्नान करने के बाद पंचकोसी यात्रा आरंभ कर दी थी तथा यात्रा पूरी करने के बाद वह गंगाजल लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। मंदिर की ओर भक्तों की लंबी कतार लगी थी। भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और बेलपत्र एपं धतूरा चढाया । इस अवसर पर पूरे परिसर में व्यापक सुरक्षा प्रबंध किये गये थे। काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के साथ मंदिर गंगा तट से सीधा जुड़ गया है। पूरे मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया है।
प्रयागराज में माघ मेला के अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि के मौके पर हजारों की संख्या में शिवभक्तों ने पवित्र संगम में आस्था की डुबकी लगायी और शिवालयों में जलाभिषेक कर भगवान शिव को प्रिय बेलपत्र,धतूरा,पुष्प,गंध और चंदन अर्पित किया। करीब एक माह तक चलने वाला माघ मेला का आज पूरी तरह समापन हो गया है। मेला क्षेत्र में प्रवास कर रहे संत व श्रद्धालु स्नान करके मेला क्षेत्र से लौटने लगे हैं।
बाराबंकी से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार पौराणिक लोधेश्वर महादेव मंदिर में लाखों कावड़ियों ने लोधेश्वर महादेव को पवित्र गंगाजल अर्पित किया।कोई अप्रिय घटना ना घटे इसलिए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के चाक-चौबंद व्यवस्था की है।
तहसील रामनगर में स्थित महाभारत कालीन प्राचीन पौराणिक लोधेश्वर महादेव शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों का हुजूम मंदिर पहुंच रहा है।
लखनऊ में बुद्धेश्वर,मनकामेश्वर,हनुमान सेतु स्थित शिवालयों में भोर से शिवभक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था। कतार में लगे श्रद्धालु अपनी बारी के इंतजार के साथ हर हर महादेव का उदघोष कर रहे थे। मंदिरों में सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम किये गये हैं। कानपुर में परमट स्थित आनंदेश्वर मंदिर के कपाट भोर तीन बजे से ही दर्शन के लिये खोल दिये गये थे। रात 12 बजे से ही यहां शिवभक्तों की लंबी कतारें लग गयी थी। इसके अलावा वनखंडेश्वर,सिद्धेश्वर, नागेश्वर समेत छोटे बड़ें शिवालयों में तिल रखने की जगह नहीं थी।
जौनपुर में प्रमुख शिव मंदिरों त्रिलोचल महादेव जलालपुर, दियावांनाथ, गौरीशंकर धाम सुजानगंज, साईनाथ, करशूल नाथ, पाताल नाथ, गोमतेश्वर नाथ केराकत, पांचों शिवाला, सर्वेश्वरनाथ, सहित अन्य शिवालयों पर सवेरे से ही श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते देखे गये। हर हर महादेव के जयघोष करते हुए अपनी बारी आने का इन्तजार करते रहे और जलाभिषेक किया। ऐतिहासिक शिव मंदिर त्रिलोचन महादेव में आज गुरुवार को सुबह से से भगवान शिव की पूजा अर्चना कर जलाभिषेक व रुद्राभिषेक कर रहे हैं। मान्यता है कि राक्षस भष्मासुर को मारने के लिए अपना तीसरा नेत्र खोला था था , इसी से इनका नाम त्रिलोचन महादेव पड़ा है । धर्मापुर बाजार में हर वर्ष की भांति शिव मंदिर केशवपुर हनुमान मंदिर स्थित शिवालय मे सुबह से ही महिलाएं और बच्चों की भीड़ जलाभिषेक के लिए उमड़ी रही हैं।
देवरिया में महाशिवरात्रि के अवसर पर विभिन्न शिवालयों में भक्त ब्रह्म बेला से ही हर हर महादेव का जप करते हुए भगवान शिव की आराधना करते हुए पूजन अर्चन एवं जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक कर रहे हैं। सोमनाथ मंदिर, पुलिस लाइन, कचहरी चौराहा, भटवलिया विद्युत उपकेंद्र व न्यू कालोनी के शिवालयों में युवतियों, महिला व पुरुष भक्तों ने व्रत रहकर और भगवान को प्रिय प्रसाद सामग्री चढ़ाकर विधि विधान से स्तुति कर रहे हैं।कई मंदिरों पर रुद्राभिषेक का भी कार्यक्रम भी चल रहा है। बिहार सीमा पर बाणासुर की तपस्थली सोहगरा धाम स्थित शिवालय में श्रद्धालुओं ने जल, बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि चढ़ाकर शिव की पूजन-अर्चन कर रहे हैं।

छोटी काशी के रूप में प्रसिद्ध श्री दुग्धेश्वरनाथ मंदिर रुद्रपुर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है। इस दौरान मंदिर में हर हर बम बम के जयघोष से दुग्धेश्वरनाथ धाम दिनभर गूंज रहा है। रुद्रपुर महाकाल शिव की नगरी कही जाती है। पुराण की व्याख्यानुसार इस क्षेत्र को हंस तीर्थ स्थल कहा जाता है। स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन के लिए देश के हर कोने भक्त आते हैं।
अमेठी से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुकुट नाथ धाम सहित क्षेत्र के शिवालयों पर सुबह से ही जलाभिषेक शुरू हो गया। मान्यता है कि यहां पूजन से मन वांछित फल भक्तों को मिलता है। जब अज्ञातवास पर पांडव निकले थे तो उन्होंने अपना मुकुट भोले बाबा को सौंप दिया था. तभी से इनका नाम बाबा मुकुटनाथ पड़ा। यह मंदिर अपने आप में बहुत से रहस्यों को समेटे हुए है। मंदिर की खास बात यह है कि मंदिर का कपाट खुलने से पहले ही बाबा मुकुटनाथ की पूजा हो जाती है. शिवलिंग के पास ग्यारह बेल पत्र, ग्यारह रुपये, दो गुलाब और दो लड्डू के साथ बाबा मुकुटनाथ का पूजा हुआ रहता है।
बागपत में बालैनी क्षेत्र स्थित पुरा महादेव के पूरेश्वर मंदिर में भगवान शिव की पूजा अर्चना की गई और जलाभिषेक किया गया। जिलाधिकारी राजकमल यादव, पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन व अपर जिलाधिकारी अमित कुमार सिंह ने आज परशु रामेश्वर पुरा महादेव मंदिर पर फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि के अवसर पर पूजा अर्चना कर झंडारोहण किया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने जलाभिषेक किया। इसके अलावा बड़ौत, बागपत, खेकड़ा तहसील क्षेत्रों के शिव मंदिरों में भी भगवान आशुतोष का जलाभिषेक किया गया। कई मंदिरों पर रुद्राभिषेक का भी आयोजन किया गया।
मेरठ के औघड़नाथ मंदिर में आस्था का सैलाब सारा दिन उमड़ता घुमड़ता रहा। गढ़ मुक्तेश्वर में कावड़ियों के जत्थे हर हर बम बम के उदघोष के साथ शिवालयों की ओर बढ़ते दिखायी पड़े। मुजफ्फरनगर के मोरना क्षेत्र के ककराला स्थित जुड़ेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
इस मौके पर अलग अलग शहरों में शिव बारात का आयोजन किया गया। गाजे बाजे के साथ शिव भक्तों ने श्रद्धा के साथ शिव पार्वती से आशीर्वाद लिया।