
झारखंड (Jharkhand) के देवघर (Deoghar ropeway incident) में रविवार को चित्रकूट के पास हुए रोपवे हादसे (Trikut Ropeway Accident) में तीन लोगों की मौत हो गई है. सेना ने लगभग 50 घंटे रेस्कयू ऑपरेशन चलाकर 56 लोगों को बचाया है. बता दें कि केबल कार में 59 लोग सवार
थे. इस हादसे के बाद जो जानकारी निकलकर सामने आ रही है. वो यह है कि सरकार समर्थक एजेंसी ने केबल कारों को ढोने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली 1,770 मीटर लंबी स्टील की रस्सी का लगभग 3 हफ्ते पहले एक सुरक्षा ऑडिट किया था और कहा था कि इसकी स्थिति ठीक है. ऑडिट रिपोर्ट में केबल की रस्सी और जोड़ों से संबधित 24 खामियों की तरफ इशारा किया था. और कहा गया था कि केबल की रस्सी और जोड़ों के भागों पर निगरानी रखी जाए. इसी के ही साथ रिपोर्ट में कहा गया था कि रस्सी को साफ और जंग से सुरक्षित रखे जाने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए
, क्योंकि रस्सी 7 साल से अधिक पुरानी है. रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर रस्सी में कोई दिक्कत दिखाई दे तो इसे फौरन बदला जाए. बता दें कि ये रिपोर्ट धनबाद स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च द्वारा तैयार की गई थी जो वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के तहत कार्य करता है. अगर रोपवे में कमी होती तो पहले ही पता चल जाताये ऑडिट 17 मार्च को कराया गया था. ऑडिट की रिपोर्ट डी बसाक मुख्य वैज्ञानिक और परियोजना समन्वयक, वायर रोप एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सीआईएमएफआर और तकनीकी अधिकारी समचक वाघमारे के द्वारा बनाई गई थी.
बसाक ने कहा कि जो 24 खामियां पाई गईं थी लेकिन इस हादसे में उन कमियों का कोई रोल नहीं है. अगर हमें रोपवे में कोई कमी मिलती तो मैं फौरन समस्या को बताता. बसाक ने कहा कि समस्या रोपवे में नहीं बल्कि रस्सी के आसपास की संरचनाओं में थी. उन्होंने कहा कि हमने जो सुरक्षा परीक्षण किया था उसमें केवल रोपवे की स्टील की रस्सी शामिल थी बाकि कुछ नहींझारखंड (Jharkhand) के देवघर (Deoghar ropeway incident) में रविवार को चित्रकूट के पास हुए रोपवे हादसे (Trikut Ropeway Accident) में तीन लोगों की मौत हो गई है. सेना ने लगभग 50 घंटे रेस्कयू ऑपरेशन चलाकर 56 लोगों को बचाया है. बता दें कि केबल कार में 59 लोग सवार थे. इस हादसे के बाद जो जानकारी निकलकर सामने आ रही है.
वो यह है कि सरकार समर्थक एजेंसी ने केबल कारों को ढोने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली 1,770 मीटर लंबी स्टील की रस्सी का लगभग 3 हफ्ते पहले एक सुरक्षा ऑडिट किया था और कहा था कि इसकी स्थिति ठीक है. ऑडिट रिपोर्ट में केबल की रस्सी और जोड़ों से संबधित 24 खामियों की तरफ इशारा किया था. और कहा गया था कि केबल की रस्सी और जोड़ों के भागों पर निगरानी रखी जाए. इसी के ही साथ रिपोर्ट में कहा गया था कि रस्सी को साफ और जंग से सुरक्षित रखे जाने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, क्योंकि रस्सी 7 साल से अधिक पुरानी है. रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर रस्सी में कोई दिक्कत दिखाई दे तो इसे फौरन बदला जाए. बता दें कि ये रिपोर्ट धनबाद स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च द्वारा तैयार की गई थी जो वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के तहत कार्य करता है. अगर रोपवे में कमी होती तो पहले ही पता चल जाताये ऑडिट 17 मार्च को कराया गया था. ऑडिट की रिपोर्ट डी बसाक मुख्य वैज्ञानिक और परियोजना समन्वयक, वायर रोप एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सीआईएमएफआर और तकनीकी अधिकारी समचक वाघमारे के द्वारा बनाई गई थी.
बसाक ने कहा कि जो 24 खामियां पाई गईं थी लेकिन इस हादसे में उन कमियों का कोई रोल नहीं है. अगर हमें रोपवे में कोई कमी मिलती तो मैं फौरन समस्या को बताता. बसाक ने कहा कि समस्या रोपवे में नहीं बल्कि रस्सी के आसपास की संरचनाओं में थी. उन्होंने कहा कि हमने जो सुरक्षा परीक्षण किया था उसमें केवल रोपवे की स्टील की रस्सी शामिल थी बाकि कुछ नहींझारखंड (Jharkhand) के देवघर (Deoghar ropeway incident) में रविवार को चित्रकूट के पास हुए रोपवे हादसे (Trikut Ropeway Accident) में तीन लोगों की मौत हो गई है. सेना ने लगभग 50 घंटे रेस्कयू ऑपरेशन चलाकर 56 लोगों को बचाया है. बता दें कि केबल कार में 59 लोग सवार थे. इस हादसे के बाद जो जानकारी निकलकर सामने आ रही है. वो यह है कि सरकार समर्थक एजेंसी ने केबल कारों को ढोने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली 1,770 मीटर लंबी स्टील की रस्सी का लगभग 3 हफ्ते पहले एक सुरक्षा ऑडिट किया था और कहा था कि इसकी स्थिति ठीक है. ऑडिट रिपोर्ट में केबल की रस्सी और जोड़ों से संबधित 24 खामियों की तरफ इशारा किया था. और कहा गया था कि केबल की रस्सी और जोड़ों के भागों पर निगरानी रखी जाए. इसी के ही साथ रिपोर्ट में कहा गया था कि रस्सी को साफ और जंग से सुरक्षित रखे जाने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, क्योंकि रस्सी 7 साल से अधिक पुरानी है.
रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर रस्सी में कोई दिक्कत दिखाई दे तो इसे फौरन बदला जाए. बता दें कि ये रिपोर्ट धनबाद स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च द्वारा तैयार की गई थी जो वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के तहत कार्य करता है. अगर रोपवे में कमी होती तो पहले ही पता चल जाताये ऑडिट 17 मार्च को कराया गया था. ऑडिट की रिपोर्ट डी बसाक मुख्य वैज्ञानिक और परियोजना समन्वयक, वायर रोप एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सीआईएमएफआर और तकनीकी अधिकारी समचक वाघमारे के द्वारा बनाई गई थी. बसाक ने कहा कि जो 24 खामियां पाई गईं थी लेकिन इस हादसे में उन कमियों का कोई रोल नहीं है. अगर हमें रोपवे में कोई कमी मिलती तो मैं फौरन समस्या को बताता. बसाक ने कहा कि समस्या रोपवे में नहीं बल्कि रस्सी के आसपास की संरचनाओं में थी. उन्होंने कहा कि हमने जो सुरक्षा परीक्षण किया था उसमें केवल रोपवे की स्टील की रस्सी शामिल थी बाकि कुछ नहीं