
रायपुर। रेलवे ने 22 ट्रेनों को एक साथ रद्द करने के बाद टिकट दलालों का यात्रियों से पैसा वसूलने का महापर्व अब शुरू हो चुका है। इनदिनों स्टेशन के टिकट काउंटर के बाहर चार में से एक यात्री कंफर्म टिकट को लेकर परेशान मिल जाएगा, इसका ही फायदा अब टिकट दलाल उठाने लगे है। क्योंकि रेलवे ने जिस रूट में टिकट को रद्द किया है, यात्रियों के पास दूसरी ट्रेन के लिए ज्यादा विकल्प बचा नहीं है। जो ट्रेन उपलब्ध है उसमें वेटिंग संख्या 100 से पार है इसमें टिकट कंफर्म होने की संभावना शून्य है।
ऐसी स्थिति में अब यात्री मजबूरन टिकट दलाल के पास मदद लेने लगे हैं। दलालों का बाजार स्टेशन से लेकर दुकानों तक सजा हुआ है, जो यात्रियों को वेटिंग टिकट को कंफर्म में बदलने का दावा कर रहे है, इसके एवज में यात्रियों दो से तीन गुना पैसा वसूला जा रहा हैं। शातिर टिकट दलाल इतनी चतुराई से यह काम कर रहे है, आरपीएफ को कानों-कान खबर नहीं है। इसके तार रायपुर से बिलासपुर और दुर्ग तक जुड़े हुए है।
टीटीई से दलाल की मिलीभगत
ट्रेन रद्द होने के बाद आरपीएफ टिकट दलालों को पकड़ने सतर्क हो चुकी है, लेकिन दलालों के काम करने का तरीका अब बदलने लगा है, जिसकी आरपीएफ को भनक भी नहीं है। दलाल टीटीई से मिलकर यात्रियों को कंफर्म टिकट दिला रहे है, जो ट्रेन दुर्ग और बिलासपुर से बनती है उसमें तत्काल टिकटों की कालाबाजारी ज्यादा हो रही है। चार्ट बनने से पहले चार घंटे पूर्व दलाल कंफर्म टिकट को लेकर टीटीई से बात कर लेते है। टीटीई दुर्ग या फिर बिलासपुर से ही सीट की उपलब्धता देखने के बाद यात्री की टिकट बना देता है वह भी रेलवे के नियम अनुसार लेकिन इसके बदले टीटीई को प्रति टिकट हजार रुपए मिल रहे हैं। दलाल से मिलकर टीटीई भी जमकर पैसा कमा रहे हैं।
बचाव के लिए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन
ट्रेन में प्रवेश करने से पहले टीटीई को पैसों की जानकारी देनी होती है, काम खत्म होने के बाद भी इसकी जांच होती है। ताकि पता चल रहे टीटीई ने काम के दौरान कोई अवैध वसूली नहीं किया है। जांच से बचने के लिए टीटीई अब दलाल को ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने को कहते है, वह भी दूसरे के नंबर में। नागपुर से कटनी तक दपूमरे के टीटीई ड्यूटी पर होते है। दलाल सीधे टीटीई से जुड़े हुए है। स्टेशन के बाहर दलाल ऐसे यात्री को पड़कते है, जिन्हे कंफर्म टिकट चाहिए। इसके बाद टीटीई से कंफर्म करते है जगह मिल पाएगी कि नहीं ? सीट उपलब्ध होने से दलाल सामान्य टिकट खरीदने को कहता है, वही जैसी ही ट्रेन स्टेशन पर पहुंचती है दलाल टीटीई से टिकट यात्री को देत देता है। पैसों का लेनदेन ऑनलाइन होता है, जिससे टीटीई पर कोई संदेह भी नहीं सकता।
स्टेशन के बाहर सक्रिय
आरक्षण केंद्रों में टिकट दलाल के एजेंट कतार में खड़े होकर आरक्षित टिकट ले रहे हैं और यात्रियों से तय किराए के तीन से चार गुना पैसा वसूल रहे हैं। आरपीएफ और जीआरपी की नजर से ओझल हो जाने वाले इन दलालों ट्रेनों की संख्या बढ़ते ही अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। दलाल छोटे स्टेशन से भी आरक्षित टिकट खरीदने लगे है। बड़े स्टेशन में मांग अधिक होने से टिकट जल्द नहीं मिल पाती। दलाल वेटिंग की स्थिति देखते हुए पहले से ही टिकट खरीद लेते है। बाद में जमा टिकटों को दलाल मनमाने दाम में बेचते है। अब दलालों ने अनाधिकृत टिकट एजेंट का काम कम कर दिया है, क्योंकि इसमें पड़केे जाने का खतरा अधिक है। इसके अलावा शहर में कुछ अनाधिकृत टिकट एजेंट द्वारा इन दिनों आईआरसीटीसी की पर्सनल आईडी से अन्य यात्रियों के लिए रिजर्वेशन टिकट बनाई जा रही है।
इन ट्रेनों में टिकट दलाली ज्यादा
– हावडा-मुंबई एक्सप्रेस
– साउथ बिहार एक्सप्रेस
– रक्सौल एक्सप्रेस
– सारनाथ एक्सप्रेस
– दुर्ग कानपूर एक्सप्रेस
– विशाखापट्टनम कोरबा एक्सप्रेस
आरक्षण भवन में जवान तैनात
ट्रेन रद्द के बाद दलाल सक्रिय हो चुके हैं। इसे लेकर आरपीएफ सतर्क हो चुकी है। आरक्षण भवन जवान तैनात है। इसके अलावा स्टेशन में भी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। इसके अलावा दुकानों में आईआरसीटीसी की आईडी जांच किया जा रहा है।