बिलासपुर : शहर समता विचार मंच बिलासपुर महिला काव्य गोष्ठी शहर अध्यक्ष स्मृति मिश्रा “रीति” के संयोजन में सफलता पूर्वक संपन्न हुई। मंच की मुख्य अतिथि गायत्री तिवारी विशिष्ट अतिथि शोभा त्रिपाठी रहीं ।
यह काव्य गोष्ठी अपरान्ह 3 बजे से 5 बजे तक चली जिसका शुभारंभ मुख्य अतिथि एवम् विशिष्ट अतिथि द्वारा माँ सरस्वती की मूर्ति में माल्यार्पण किया गया एवम् माँ सरस्वती की वंदना की सुंदर प्रस्तुति संगीता सिंह बनाफल ने किया।
काव्य गोष्ठी का कुशल संचालन संगीता बनाफर ने किया । इस काव्य गोष्ठी में रश्मि गुप्ता,आशा,पिंकी गौर ,रेणु बाजपेयी, धनेश्वरी गुल,शोभा त्रिपाठी, संगीता बनाफर,स्मृति अलका अग्रवाल, वंदना ठाकुर,सोनाली तिवारी, रजनी खनूजा आदि कवित्रियो ने विभिन्न रस एवम् छंद में अपनी कविताओं की प्रस्तुति दी।
धरा की हरितिमा पर मुग्ध काव्य शब्दोंके सृजन, नें गोष्ठी को सफल बना दिया. आभार प्रदर्शन स्मृति मिश्रा ने किया.हिन्दी सेवा को समर्पित मंच की इकाइयां पूरे देश मे करीब सौ स्थानों पर है।
काव्यगोष्ठी का अर्थ समझाइए…..
परंतु काव्यमीमांसाकार राजशेखर ने काव्यपरीक्षण (10/17477) के लिये जिस काव्यगोष्ठी अथवा कविसमाज की व्यवस्था शासकों को दी है यह भिन्न कोटि की थी। प्राचीन काल की ऐसी काव्यगोष्ठियों में कभी कभी शास्त्रार्थ भी हुआ करते थे। कहा जाता है, कि ऐसी गोष्ठियों का सभापतित्व वासुदेव, शालिवाहन हाल, शूद्रक और साहसांक विक्रमादित्य तक ने की थी। मानसोल्लास (पृ. 171589) के अनुसार सोमेश्वर के दरबार में कभी कभी तीसरे पहर कवि गोष्ठियाँ भी हुआ करती थीं जिनमें कवि, गायक, विद्वान् और नैयायिक राजसिंहासन के पास बैठकर भाग लिया करते थे। ऐसे अवसरों पर पारितोषिक वितरण की व्यवस्था भी रहती थी, जहाँ सद्धर्मी भी आमंत्रित किए जाते थे।