नई दिल्ली: सहारा इंडिया कंपनी पर भरोसा कर देश के करोड़ों लोगों ने अपना पैसा निवेश किया था, लेकिन आज निवेशक अपने ही पैसे के लिए दर—दर की ठोकर खा रहे हैं। हालांकि निवेशकों के पैसे को लेकर सहारा की ओर से ऐसा कहा गया है कि कंपनी ने सभ इंवेस्टर्स के पैसे सभी के पास जमा कर दिए हैं। लेकिन सेबी का कहना है कि अब तक महज 81.70 करोड़ रुपए। के लिए 53,642 ओरिजिनल बॉन्ड सर्टिफिकेट / पास बुक से जुड़े 19,644 आवेदन मिले हैं। वहीं, सहारा इंडिया की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है।
दरअसल कंपनी की ओर से 85 एकड़ की एक जमीन पर अपना दावा पेश करते हुए झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने कंपनी पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, इस जमीन पर राज्य सरकार ने भी दावा किया था, जिसे कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा है कि यह जमीन पाल ब्रदर्स की है।
सरकार ने साल 2019 में 11 एकड़ जमीन अस्पताल को दी थी। अदालत ने अस्पताल से कहा कि वह राज्य सरकार से क्षतिपूर्ति मांग सकते हैं। पूरे मामले में हाईकोर्ट ने अपना फैसला पहले ही सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में सहारा ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ अपील की थी। सेबी की तरफ से यह जुर्माना 2008 और 2009 में ऐच्छिक पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर जारी करने में नियामकीय नियमों के उल्लंघन को लेकर लगाया गया था। सेबी ने जिन व्यक्तियों पर जुर्माना लगाया है, उनमें अशोक रॉय चौधरी, रवि शंकर दुबे और वंदना भार्गव भी शामिल हैं। जुर्माने की राशि संयुक्त रूप से 45 दिन के अंदर जमा करनी है।
इससे पहले मार्केट रेगुलेटर सेबी ने सहारा ग्रुप की दो कंपनियों, सुब्रत रॉय और तीन अन्य लोगों पर 12 करोड़ का भारी जुर्माना लगाया था, जिन कंपनियों पर जुर्माना लगाया गया था उनमें सहारा कमोडिटी सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ-साथ सुब्रत रॉय व तीन अन्य शामिल हैं।
गौरतलब है कि पिछले दिनों वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी की तरफ से लोकसभा में जानकारी दी गई थी कि सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 232.85 लाख निवेशकों से 19400 करोड़ और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (SHICL) ने 75 लाख निवेशकों से 6380 करोड़ रुपए की रकम इकट्ठा की थी।