टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को सुप्रीम कोर्ट ने तगड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें आम्रपार्टी मामले मेंनोटिस जारी किया है। वहीं कोर्ट ने इस मामले में मध्यस्थता की कार्रवाई पर भी रोक लगा दिया है। धोनी ने कोर्ट से अपने बकाया 40 करोड़ रूपए दिलाने अपील की थी।महेन्द्र सिंह धोनी ने रियल इस्टेट कंपनी आम्रपाली ग्रुप के ब्रांड एम्बेसडर के तौर पर काम किया था। इस काम की डील करोड़ों में हुई थी।
किसी कारणवश धोनी ने वर्ष 2016 मंे इस गु्रप से अपना रास्ता अलग कर लिया था। इस दौरान गु्रप से उन्हें करोड़ों रूपए मेहताना के लेने थे, लेकिन गु्रप ने उन्हें बकाया राशि का भुगतान नहीं किया। इसके खिलाफ धोनी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। धोनी आम्रपाली ग्रुप द्वारा उन्हें पेंटहाउस न दिए जाने और कंपनी द्वारा उनका नाम देनदारों की सूची में शामिल करने को लेकर कोर्ट पहुंचे थे। धोनी ने अपनी याचिका में लिखा था कि उन्होंने रांची में आम्रपाली सफारी में एक पेंटहाउस बुक किया था।इसके अलावा समूह के प्रबंधन ने उन्हें अपना ब्रांड एम्बेसडर भी बनाया था, लेकिन कंपनी ने उन्हें धोखा दिया।
ब्रांड एम्बेसडर के तौर पर जो बकाया राशि थी, उसका भी भुगतान नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त रिसीवर ने धोनी समेत उन 1800 लोगों को नोटिस भेजा था जिन्होंने आम्रपाली ग्रुप की अलग.अलग परियोजनाओं में घर खरीदे हुए हैं। इन सभी को 15 दिन के अंदर पैसा जमाने का निर्देश मिला था।
धोनी कभी आम्रपाली ग्रुप के ब्रांड एंबेसडर थे। साल 2016 में उन्होंने खुद को आम्रपाली ग्रुप से अलग कर लिया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर अपनी 40 करोड़ रुपये की फीस दिलाने की मांग भी की थी।