नेशनल पेंशन स्कीम यानी एनपीएस में निवेश करने वालों के लिए अहम खबर है। पेंशन फंड रेग्युलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी के नए सर्कूलर के अनुसार ऑल सीटिजन मॉडल के तहत निवेशकों को सेंट्रल रिकॉर्ड कीपिंग एजेंसी यानी सीआरए बदलने के लिए अब वित्तीय वर्ष में दो बार मौके मिलेंगे।
नेशनल पेंशन स्कीम सरकारी व प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए सरकार और पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी की एक निवेश स्कीम है. पहले इस योजना में केवल सरकारी कर्मचारी निवेश कर सकते थे, लेकिन साल 2009 में इसे सभी कैटगरी के लोगों के लिए खोल दिया गया. इसमें नौकरी काल के दौरान निवेश करने पर व्यक्ति को 60 साल की उम्र पर पहुंचने पर एकमुश्त रिटायरमेंट फंड और बाद में एन्युटी बेनिफिट उपलब्ध होता है. इसके साथ ही NPS में जमा पर टैक्स छूट भी मिलती है. यह अकाउंट आप अपने नाम से या फिर अपनी पत्नी के नाम से ओपन करवा सकते हैं.
मगर आपको बता दें कि इन्हीं प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों के लिए एनपीएस से जुड़ा एक नियम बदला गया है। यहां हम आपको उसी नियम की जानकारी देंगे। यदि आप भी प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे हैं और एनपीएस में निवेश करते हैं तो नये नियम को जानने के लिए आपको इस खबर को अंत तक पढ़ना चाहिए।
क्या है कॉर्पोरेट एनपीएस मॉडल:
सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि कॉर्पोरेट एनपीएस मॉडल क्या है। इस मॉडल के तहत आप जॉब के दौरान कुछ पैसा कांट्रिब्यूट करेंगे। ये पैसा अपने रिटायरमेंट के लिए होगा। कंपनियां भी रिटायरमेंट फंड्स के लिए योगदान करेंगी। इसमें कंपनी और कर्मी दोनों योगदान कर सकते है।
एनपीएस के मौजूदा नियमों के तहत टीयर 1 खाते में एक बार में कम से कम 500 रुपये जमा करने जरूरी हैं। वहीं सालाना न्यूनतम 6 हजार रुपये का योगदान होना जरूरी है। यही वो नियम है जो अपडेट किया गया है। साल भर में आपको एक बार योगदान करना ही होगा। वहीं टीयर 2 खाते में न्यूनतम 250 रुपये का योगदान जरूरी है। वहीं इस खाते में वित्त वर्ष के आखिर में 2000 रुपये का बैलेंस जरूरी कर दिया गया है। कम से कम एक बार कांट्रिब्यूशन इस खाते में भी जरूरी है।
टैक्स बेनफिट भी जानिए:
एनपीएस में निवेश करने वालों को टैक्स बेनेफिट भी मिलता है। अगर आप सैलरी पर काम करने वाले व्यक्ति हैं और सीटीसी स्ट्रक्चर ऐसा है, जिसके अनुसार कंपनी आपके एनपीएस खाते में निवेश कर सकती है तो उस स्थिति में आप बेसिक सैलेरी और महंगाई भत्ते के 10 फीसदी तक की कटौती के लिए क्लेम कर सकते हैं। सरकारी सेक्टर में यह सीमा और अधिक है। वहां ये लिमिट 14 फीसदी है। दूसरा फायदा यह है कि आपके कॉन्ट्रिब्यूशन को सेक्शन 80सीसीडी (1) और 80सीसीडी (2), 1(बी) के तहत छूट मिलेगी।
कब हुई थी शुरुआत:
केंद्र सरकार ने 2011 के आखिरी महीने में एनपीएस को कॉरपोरेट कर्मियों के लिए शुरू किया था। वैसे यह योजना 1 जनवरी 2004 से शुरू हुई थी। मगर तब सैन्य बलों को छोड़ कर अन्य सभी केंद्रीय कर्मियों के लिए ही इस योजना को शुरू किया गया था।
रजिस्टर करने का तरीका:
वे कंपनियां जो एनपीएस के लिए रजिस्टर करना चाहती हैं, उन्हें यह काम पॉइंट ऑफ प्रेजेंस के जरिए करना होगा। इससे उनके कर्मियों के रजिस्ट्रेशन में मदद मिलेगी। इस तरह सब्सक्राइबर्स को दोनों खाते (टियर-1 और टियर-2) खोलने में मदद मिलेगी।