नई दिल्ली : किसी भी वस्तु या कार्य को प्रारंभ करने में मुहूर्त देखा जाता है, माना जाता है कि इससे मन को बड़ा सुकून मिलता है। शुभ तिथि, वार, माह व नक्षत्रों में कोई इमारत बनाना प्रारंभ करने से न केवल किसी भी परिवार को आर्थिक, सामाजिक, मानसिक व शारीरिक फायदे मिलते हैं वरन उस परिवार के सदस्यों में सुख-शांति व स्वास्थ्य की प्राप्ति भी होती है, मनुष्य के जीवन में धन का बहुत महत्व होता है.
जीवन में छोटी सी छोटी चीज से लेकर बड़ी से बड़ी चीज को पाने के लिए इस धन की जरूरत होती है. भले ही जीवन में धन सब कुछ न हो लेकिन सब कुछ पाने के लिए धन की बहुत जरूरत होती है. इसके बगैर हमारा जीवन अधूरा होता है. यही कारण है कि धन को पाने के लिए हर आदमी दिन-रात कोई न कोई जुगत लगाता फिरता है.कुछ लोगों का कहना होता है कि कहीं से धन आए तो मैं कुछ कर के दिखाऊं और धन कहता है कि पहले तुम कुछ कर दिखाओ तो मैं आऊं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर धन किसके पास और कैसे आता है, आइए इसे धन से जुड़े प्रेरक वाक्यों के माध्यम से जानते हैं.
किसी भी शुभ महीने के रोहिणी, पुष्य, अश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपदा, स्वाति, हस्तचित्रा, रेवती, शतभिषा, धनिष्ठा सर्वाधिक उत्तम एवं पवित्र नक्षत्र हैं।दान, भोग और नाश ये धन की तीन गतियां मानी जाती हैं. इसमें से जो धन का दान या भोग नहीं करता है, उसके साथ धन की अंतिम गति यानि उसका नाश हो जाता है.बिना प्लानिंग के बिजनेस करने से बचें. ये आपको भविष्य में मुसीबत में डाल सकता है. जब आप अपना स्टार्टअप का आइडिया फाइनल कर लें तो एक डायरी में बिजनेस से संबंधित सभी बातें लिख लें.
गंदे वस्त्र पहनने वाले, दांत गंदे रखने वाले, पेटू व्यक्ति, कड़वे शब्दों का प्रयोग करने वाले, ऊषा काल यानी सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त के समय सोने वाले व्यक्ति के यहां कभी भी धन की देवी नहीं ठहरती हैं.धन शक्ति, सुरक्षा और स्वतंत्रता है. इसके न होने और होने में सिर्फ इतना अंतर होता है कि यदि यह न हो तो व्यक्ति ज्वालामुखी के पर्वत के ढाल पर रहता है, जबकि होने पर स्वर्ग के बगीचे में निवास करता हैं