गौरेला-पेंड्रा-मरवाही । गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में करीब 2 साल के बाद दुर्लभ सफेद भालू देखने को मिला है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। भालू लैंड के नाम से मशहूर मरवाही वनमंडल में गुरुवार को सफेद भालू दिखाई दिया, जबकि इसे इस इलाके से विलुप्त मान लिया गया था।ये सफेद भालू काले भालू के साथ घूमता और खेलता हुआ नजर आया।
मरवाही रेंज के माड़ाकोड़ गांव में सफेद भालू को दूर से देखकर लोग रोमांचित हो उठे। सफेद भालू वयस्क नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने तुरंत सफेद भालू का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। माड़ाकोड़ मरवाही वनमंडल का सघन भालू क्षेत्र है। यहां काफी संख्या में भालू रहते हैं, लेकिन सफेद भालू लंबे समय से दिखाई नहीं दे रहे थे।सफेद भालू को घूमते हुए देखा गया।सफेद भालू को घूमते हुए देखा गया।
गांववालों ने मरवाही वन परिक्षेत्र के अधिकारी दरोगा मरावी को सफेद भालू की जानकारी देनी चाही, लेकिन फिलहाल उनसे संपर्क नहीं हो सका है। इससे पहले 21 दिसंबर 2020 को मरवाही के अंडी गांव में एक कुएं में गिरकर सफेद भालू की मौत हो गई थी। उस वक्त भी इलाके में सफेद भालू के देखे जाने की सूचना गांववालों ने वन विभाग को काफी पहले से दी थी, लेकिन कर्मचारियों-अधिकारियों की अनदेखी के कारण आखिरकार सफेद भालू कुएं में गिरा हुआ पाया गया था।
बाद में उसे निकाले जाने पर वो मृत पाया गया था।2020 में सफेद भालू की कुएं में गिरने से मौत हो गई थी।2020 में सफेद भालू की कुएं में गिरने से मौत हो गई थी।उस वक्त मरवाही क्षेत्र के SDO संजय त्रिपाठी ने कहा था कि जंगल के बीच जहां कहीं भी बस्तियों में बिना मुंडेर के कुएं हैं, उन्हें सुरक्षित किया जाएगा। जिससे वन्यप्राणियों के जीवन को खतरा नहीं हो। हालांकि इसे लेकर ज्यादा काम नहीं हो सका। इधर एक बार फिर सफेद भालू देखे जाने की खबर से वन्यजीव प्रेमियों में खुशी है।
लोगों का कहना है कि जंगल के इस बेहद शांत माने जाने वाले प्राणी के प्रति वन विभाग को भी संवेदनशीलता दिखाए जाने जरूरत है।जिले के माड़ाकोट, गंगनई, सेमरदर्री, चिल्हान नाका, करहनिया, लोहारी मरवाही के जंगलों में काफी संख्या में भालू पाए जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, मरवाही वनमंडल में करीब 500 भालू हैं। इन्हीं में से कुछ सफेद भालू भी हैं। 1987, 1992, 1999, 2008 और 2020 में भी सफेद भालू इन इलाकों में देखे गए थे। ये इलाके भालुओं का प्राकृतिक रहवास है।
इस इलाके में महुआ, जामुन, तेंदू और शहद होने के कारण यहां रहना भालुओं को पसंद है। मरवाही वन मंडल के एक सफेद भालू को बिलासपुर के कानन पेंडारी चिड़ियाघर में भी रखा गया है।इन सफेद भालुओं के रंग की वजह मेलेनिन की कमीदरअसल सफेद भालू मुख्य रूप से ध्रुवीय क्षेत्रों में रहते हैं। भारत में अधिकतर काले भालू ही पाए जाते हैं। मरवाही वनमंडल में पाए जाने वाले सफेद भालुओं को एलबिनो कहा जाता है। ऐल्बिनिज़म उन कोशिकाओं का परिणाम है, जो मेलेनिन का उत्पादन नहीं कर सकते। इससे त्वचा, आंखों और बालों का रंग सफेद हो जाता है।
जब ऐल्बिनिज़म मौजूद होता है, तो जानवर सफेद या गुलाबी दिखाई दे सकता है।मेलेनिन की कमी के कारण भालू का रंग सफेद।मेलेनिन की कमी के कारण भालू का रंग सफेद।एक जानवर पूरी तरह से एल्बिनो हो सकता है या ल्यूसिज्म हो सकता है। शुद्ध एल्बिनो जानवरों की आंखें, नाखून, त्वचा या शल्क गुलाबी होंगे। गुलाबी रंग त्वचा के माध्यम से दिखने वाली रक्त वाहिकाओं यानी ब्लड वेसेल्स से आता है। ल्यूसिज्म वाले जानवरों में ज्यादातर विशिष्ट लेकिन हल्के रंग के पैटर्न हो सकते हैं।