रायपुर: धर्मसिंधु ग्रंथ और ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार चैत्र माह की पूर्णिमा पर तीर्थ स्नान, दान, व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं। इस दिन किए गए विष्णु पूजन से देवी लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं। इस दिन चंद्रमा भी सौलह कलाओं से पूर्ण होता है। ग्रंथों के अनुसार इस दिन एक समय भोजन करके पूर्णिमा, चंद्रमा या सत्यनारायण का व्रत करें तो सब प्रकार के सुख, सम्पदा और श्रेय की प्राप्ति होती है। नए संवत्सर की पहली पूर्णिमा होने से ग्रंथों में इसे महत्वपूर्ण पर्व माना गया है। इसे मधु पूर्णिमा भी कहा जाता है। सूर्य को अर्घ्य देकर दान, व्रत और भगवान विष्णु की पूजा का संकल्प लिया जाता है। इसलिए इसे स्नान और दान की पूर्णिमा भी कहा जाता है। शास्त्रों के जानकारों के अनुसार लगभग 70 साल बाद हनुमान जयंती पर चित्रा नक्षत्र, हर्षल योग बन रहा है। ये योग त्रेता युग के जैसे माना जाता है।
चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि 05 अप्रैल को सुबह 09 बजकर 19 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 06 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 04 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, इस बार हनुमान जयंती 06 अप्रैल को ही मनाई जाएगी। साथ ही इस साल हनुमान जयंती हर्षण योग में मनाई जाएगी। इस दिन हस्त और चित्रा नक्षत्र रहेगा। हनुमान जयंती पूजन मुहूर्त सुबह 06 बजकर 06 मिनट से 07 बजकर 40 मिनट तक सुबह 10 बजकर 49 मिनट से दोपहर में 12 बजकर 23 मिनट तक दोपहर में 12 बजकर 23 मिनट से 01 बजकर 58 मिनट तक दोपहर 01 बजकर 58 मिनट तक से 03 बजकर 32 मिनट तक शाम 05 बजकर 07 मिनट से 06 बजकर 41 मिनट तक शाम 06 बजकर 41 मिनट से रात 08 बजकर 07 मिनट तक हनुमान जयंती का महत्व हनुमान जयंती के अवसर पर मंदिर जाकर हनुमान जी का दर्शन करना चाहिए और उनके सामने घी या तेल का दीपक जलाना चाहिए। इसके बाद 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।
मान्यता है कि ऐसा करने से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा से जीवन की समस्याओं से मुक्ति मिलती है। इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ पूजा करने से शनि दोष से मुक्ति मिलने की भी मान्यता है। हनुमान जयंती पूजन विधि व्रत से पहले एक रात को जमीन पर सोने से पहले भगवान राम और माता सीता के साथ-साथ हनुमान जी का स्मरण करें। अगले दिन प्रात: जल्दी उठकर दोबारा राम-सीता एवं हनुमान जी को याद करें।
हनुमान जयंती प्रात: स्नान ध्यान करने के बाद हाथ में गंगाजल लेकर व्रत का संकल्प करें। इसके बाद, पूर्व की ओर भगवान हनुमानजी की प्रतिमा को स्थापित करें। विनम्र भाव से बजरंगबली की प्रार्थना करें। इसके बाद षोडशोपाचार की विधि विधान से श्री हनुमानजी की आराधना करें। हनुमान जयंती पौराणिक कथा अंजना एक अप्सरा थीं, हालांकि उन्होंने श्राप के कारण पृथ्वी पर जन्म लिया और यह श्राप उनपर तभी हट सकता था जब वे एक संतान को जन्म देतीं। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, केसरी श्री हनुमान जी के पिता थे। वे सुमेरू के राजा थे और केसरी बृहस्पति के पुत्र थे। अंजना ने संतान प्राप्ति के लिए 12 वर्षों की भगवान शिव की घोर तपस्या की और परिणाम स्वरूप उन्होंने संतान के रूप में हनुमानजी को प्राप्त किया। ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी भगवान शिव के ही अवतार हैं
मकर –
अभी कार्य सफल नहीं होगा किंतु व्यावसायिक मामलों में फाॅलोअप देते रहें
दिूरसंचार से भी आपको लाभ मिल सकता है
अपने संपर्क सूत्र मजबूत करें
उपाय –
जल में कच्चा दूध डालकर अभिषेक करें
दुर्गा चालीसा का पाठ करें
कुंभ –
अपने बड़े बुजूर्गो का साथ प्राप्त होगा
पारिवारिक सदस्य के स्वास्थ्य से उलझन
दिनभर व्यस्तता रहेगी
अपनो की नाराजगी दूर करने के उपाय करें
उपाय –
सूर्य को जल दें
गुड या खीर खिलायें
मीन –
आज के दिन आप किसी के भरोसे में धोखा खा सकते हैं
अपने जीवनसाथी के स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहें
खानपान की असवाधानी हानि दे सकती है
उपाय –
गाय को रोटी खिलायें