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नई दिल्ली:- कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात कृषि एक्सपर्ट डॉ एनसी त्रिपाठी ने बताया कि मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखने के लिए गहरी जुताई करना बेहद जरूरी है. गहरी जुताई करने से मिट्टी में वायु संचार बेहतर होता है. जिस मिट्टी की संरचना बेहतर होती है और उर्वरा शक्ति में इजाफा होता है।
फसल की कटाई के बाद बचाने वाले फसल अवशेष को खेत में ही निस्तारित करें. ऐसा करने से वायु प्रदूषण भी नहीं होगा इसके अलावा मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा बढ़ेगी. जिससे किसानों को रासायनिक उर्वरकों का सहारा नहीं लेना होगा.
समय-समय पर किसानों को मिट्टी की जांच भी करानी चाहिए. मिट्टी की जांच करने से किसानों को पता चल जाता है कि उनके खेत में कौन से पोषक तत्व की कमी है. किसान मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर पोषक तत्वों की पूर्ति कर सकते हैं.
मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए किसान हरा खाद भी उगा सकते हैं. किसान हरी खाद को खेत में उगाकर उपजाऊ क्षमता बढ़ा सकते हैं. गेहूं की फसल की कटाई के बाद ढैचा की बुवाई कर दें. किसान मूंग या उड़द की भी बुवाई कर सकते हैं.
मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बनाए रखने के लिए फसल चक्र अपनाना भी जरूरी है. किसानों को लगातार एक ही फसल की बुवाई नहीं करनी चाहिए. कभी दलहन, कभी तिलहन तो कभी अन्य फसलों की बुवाई भी करते रहना चाहिए. ऐसा करने से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ेगी.
गोबर की सड़ी हुई खाद मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए बेहद ही कारगर होता है. गोबर की खाद में सभी सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं जो कि एक उपजाऊ मिट्टी के लिए आवश्यक होते हैं. हर 6 महीने बाद किसानों को गोबर की सड़ी हुई खाद को मिट्टी में मिलाना चाहिए. अगर किसानों के पास वर्मी कंपोस्ट उपलब्ध हो तो उसको भी मिट्टी में मिला सकते हैं.
