नई दिल्ली:- ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना जाता है. वे हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं. लखनऊ के ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के अनुसार इस वर्ष, चैत्र अमावस्या के दिन शनिदेव अपनी राशि बदलेंगे, जिससे कई राशियों पर इसका प्रभाव पड़ेगा. वर्तमान में शनिदेव कुंभ राशि में विराजमान हैं, लेकिन चैत्र अमावस्या के दिन वे कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में गोचर करेंगे. यह परिवर्तन 29 मार्च को रात 11 बजकर 01 मिनट पर होगा.
सिंह और धनु राशि पर ढैय्या का प्रभाव
उमाशंकर मिश्र के अनुसार शनिदेव के मीन राशि में गोचर करने से मकर राशि के जातकों को साढ़ेसाती से मुक्ति मिलेगी, वहीं कर्क और वृश्चिक राशि के जातकों को शनि की ढैय्या से राहत मिलेगी. हालांकि, मेष राशि के जातकों के लिए यह बदलाव कुछ चुनौतियां लेकर आएगा, क्योंकि उन पर साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू हो जाएगा. इसके अतिरिक्त, सिंह और धनु राशि के जातकों पर शनि की ढैय्या का प्रभाव भी शुरू होगा.
मेष राशि पर साढ़ेसाती का प्रभाव ज्योतिषाचार्य ने बताया कि शनिदेव का गोचर मेष राशि के जातकों के जीवन में कुछ विषम परिस्थितियां पैदा कर सकता है. उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, आर्थिक परेशानियां और पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ सकता है. कार्यक्षेत्र में भी बाधाएं आ सकती हैं और मेहनत का उचित फल मिलने में देरी हो सकती है.
साढ़ेसाती के प्रभाव को कम करने के उपाय
यदि आप मेष राशि के जातक हैं, तो साढ़ेसाती के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए मार्च महीने से ही यह उपाय करना शुरू कर दें..
हनुमान चालीसा का पाठ: मेष राशि के स्वामी मंगल देव हैं और उनके आराध्य हनुमान जी हैं. इसलिए, नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें. हनुमान जी की पूजा करने से शनि की बाधा दूर होती है.
बजरंगबली की पूजा: हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए मंगलवार के दिन बजरंगबली की विशेष पूजा करें. पूजा के समय पुरुष हनुमान जी को एक चुटकी सिंदूर अर्पित करें.
रामरक्षा स्तोत्र का पाठ: शनिदेव की कृपा पाने के लिए मंगलवार के दिन पूजा के समय रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें. यह उपाय हर प्रकार की परेशानी को दूर करने में सहायक होता है.
भगवान शिव की आराधना: शनिदेव को महादेव का परम भक्त माना जाता है. इसलिए, भगवान शिव की पूजा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा साधक पर बरसती है.
शिवलिंग पर अभिषेक: शनि की बाधा दूर करने के लिए सोमवार और शनिवार के दिन स्नान-ध्यान के बाद गंगाजल या सामान्य जल में काले तिल मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें. इस उपाय को करने से साढ़ेसाती का प्रभाव कम होता है.
उमाशंकर मिश्र का कहना है कि, इन उपायों के साथ-साथ, अपने कर्मों को शुद्ध रखने और जरूरतमंदों की मदद करने से भी शनिदेव की कृपा प्राप्त की जा सकती है. धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ, मेष राशि के जातक साढ़ेसाती के प्रभाव को कम कर सकते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं.