मुंबई :- शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को आरोप लगाया कि वक्फ कानून लागू करने के बाद भाजपा अब अपने मित्रों के लिए ईसाइयों, जैनियों, बौद्धों और यहां तक कि हिंदू मंदिरों की जमीन पर नजर गड़ाए हुए है.
एनसीपी (शरद पवार) नेता जितेंद्र आव्हाड ने भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र ऑर्गनाइजर में छपे एक लेख का हवाला देते हुए इसी तरह का आरोप लगाया. ठाकरे ने अपनी पूर्व सहयोगी भाजपा को उसके स्थापन दिवस पर सलाह दी कि वह भगवान राम की तरह व्यवहार करे.
उन्होंने कहा, “वक्फ कानून के बाद अगला कदम ईसाई, जैन, बौद्ध और यहां तक कि हिंदू मंदिरों की जमीन पर नजर रखना होगा. ठाकरे ने कहा कि वे अपने दोस्तों को कीमती जमीन दे देंगे. उन्हें किसी भी समुदाय से कोई प्यार नहीं है.”
बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को वक्फ विधेयक, 2025 को अपनी मंजूरी दे दी, जिसे इस सप्ताह की शुरुआत में संसद ने पारित किया था. वहीं सरकार का कहना है कि यह कानून देश में मुस्लिम धार्मिक बंदोबस्त से संबंधित सुधारों की शुरुआत करेगा.
ठाकरे ने ऑर्गनाइजर के लेख का हवाला देते हुए कहा, “उन्होंने इसे सार्वजनिक कर दिया है और हर किसी को अपनी आंखें खोल लेनी चाहिए.”
ठाकरे शिव संचार सेना के शुभारंभ के दौरान बोल रहे थे, जो पार्टी की आईटी और संचार शाखा होगी. जब उनसे पूछा गया कि क्या शिवसेना (यूबीटी) अन्य विपक्षी दलों की तरह वक्फ विधेयक को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी, तो उन्होंने इससे इनकार किया.
वक्फ भूमि भाजपा के उद्योगपति मित्रों के पास चली जाएगी : राउत
वहीं ठाकरे की पार्टी के सहयोगी संजय राउत ने कहा कि भविष्य में सभी वक्फ भूमि भाजपा के उद्योगपति मित्रों के पास चली जाएगी. राउत ने कहा कि भाजपा को गरीबी पर नहीं बोलना चाहिए और दावा किया कि पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले उसके द्वारा खर्च किया गया धन महाराष्ट्र के बजट के बराबर था.
अब देश में ईसाइयों की बारी : जितेंद्र आव्हाड
इस बीच, एनसीपी (शरद पवार) नेता जितेंद्र आव्हाड ने दावा किया कि मुसलमानों को निशाना बनाने के बाद अब देश में ईसाइयों की बारी है.
ठाणे के कलवा-मुंब्रा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि आरएसएस के मुखपत्र ने दावा किया है कि वक्फ बोर्ड नहीं बल्कि भारतीय कैथोलिक चर्च देश में सबसे बड़ा भूस्वामी है. उनके अनुसार, ‘भारत में किसके पास ज़्यादा जमीन है? कैथोलिक चर्च बनाम वक्फ बोर्ड बहस’ शीर्षक वाला लेख 3 अप्रैल को प्रकाशित हुआ था.
आव्हाड ने एक्स पर दावा किया कि लेख में कहा गया था, “कई वर्षों से यह आम धारणा रही है कि वक्फ बोर्ड भारत में सरकार के बाद दूसरा सबसे बड़ा भूस्वामी है, हालांकि, यह दावा देश में भूमि स्वामित्व के वास्तविक आंकड़ों से मेल नहीं खाता है.
एनसीपी विधायक ने ऑर्गनाइजर के लेख का हवाला देते हुए कहा कि भारत का कैथोलिक चर्च सबसे बड़ा गैर-सरकारी भूस्वामी होने का गौरव रखता है, जिसके पास देश भर में फैले विशाल भू-भाग हैं. आव्हाड के मुताबिक लेख में यह भी कहा गया है कि कैथोलिक चर्च के पास पूरे देश में लगभग 17.29 करोड़ एकड़ (7 करोड़ हेक्टेयर) भूमि है.
आव्हाड ने लेख के हवाले से अपने पोस्ट में लिखा, इसकी अधिकांश भूमि ब्रिटिश शासन के दौरान अधिग्रहित की गई थी. 1927 में, ब्रिटिश प्रशासन ने भारतीय चर्च अधिनियम पारित किया, जिससे चर्च को बड़े पैमाने पर भूमि अनुदान की सुविधा मिली.
उन्होंने कहा कि ऑर्गनाइजर के लेख में यह भी कहा गया है कि क्या कुछ भूमि संदिग्ध तरीकों से प्राप्त की गई थी. उन्होंने कहा कि यह लेख इसलिए अहम है क्योंकि यह ऐसे समय आया है जब संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित वक्फ विधेयक पर तीखी बहस छिड़ी है.
आरएसएस से जुड़ी पत्रिका पर निशाना साधते हुए आव्हाड ने दावा किया, “ऑर्गेनाइजर ने 1950 में संविधान और भारतीय तिरंगे का विरोध किया था.