नई दिल्ली :- जैसा की आप जान रहे हैं की उत्तर प्रदेश में चौथे चरण की 13 सीटों पर लोकसभा चुनाव 2024 के लिए 13 मई को वोटिंग होनी है. अवध, तराई और सेंट्रल यूपी के कुल 13 जिलों में होने वाले चुनाव में बीजेपी और सपा-कांग्रेस के बीच ही लड़ाई है. हालांकि बहुजन समाज पार्टी ने अपने कैंडिडेट इस प्रकार चुने हैं जिसके चलते उसने कई सीटों पर लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है. सबसे खास बात यह है कि 2019 के लोकसभा चुनावों में इन सभी सीटों पर भाजपा ने जीत का परचम लहराया था. इसलिए बीजेपी के लिए साख का सवाल है यहां का चुनाव. चूंकि कन्नौज में भी चुनाव इसी चरण में होने वाला है इसलिए समाजवादी पार्टी के मुखिया और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए भी साख का सवाल है. खीरी और उन्नाव में भी जबरदस्त संघर्ष है, क्योंकि खीरी में अजय मिश्र टेनी और उन्नाव में साक्षी महाराज की किस्मत का फैसला होना है.
-समीकरणों में भी इस बार भारी है बीजेपी
बीजेपी ने जिस तरह इन 13 सीटों पर अपने उम्मीदवार तय किए हैं उससे तो यही लगता है कि पार्टी इन सभी सीटों को दुबारा जीतने के लिए तैयार बैठी है. पार्टी ने अधिकांश सीटों पर अपने सांसदों को फिर से टिकट दिया है. मतलब सीधा है कि उन्हें भरोसा है कि उनके सांसदों से जनता नाराज नहीं है.बीजेपी ने केवल कानपुर और बहराइच में अपने प्रत्याशी बदले हैं. इसके पीछे दरअसल एक कारण और है . बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनावों में इन 13 सीटों में से करीब 10 सीटों पर 12 से 32 प्रतिशत अधिकत मतों से चुनाव जीता था. बीजेपी के लिए इस बार संतोष की बात ये है कि उसके साथ इस बार रालोद भी है जो पिछली बार समाजवादी पार्टी के साथ थी.सपा और बसपा के भी अलग-अलग चुनाव लड़ने का फायदा बीजेपी को मिलने वाला है. पिछली बार कन्रौज, मिश्रिख और इटावा में ही सपा-बसपा बीजेपी को टक्कर दे सकीं थीं. उसमें भी कांटे की टक्कर तो केवल कन्नौज में हुआ था.
