नई दिल्ली :- शनि, जिन्हें सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है, जब भी अपनी चाल बदलते हैं तो कई राशियों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है. खासकर, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव मानव जीवन में नकारात्मकता लाता है, जिससे कई तरह की परेशानियां उत्पन्न होने लगती हैं और जीवन में अस्थिरता महसूस होती है. हाल ही में शनि ने मीन राशि में प्रवेश किया है, जिसके चलते कुछ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव शुरू हो गया है.
हालांकि, निराशा की कोई बात नहीं है. शनि के इस दुष्प्रभाव को कम करने के लिए एक विशेष तिथि बेहद करीब है. इस दिन किए गए कुछ खास उपाय आपको इन परेशानियों से मुक्ति दिला सकते हैं. आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य से कि वे उपाय क्या हैं और किस दिन करना चाहिए.
क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य
ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्रा के अनुसार, पूरे उत्तर भारत में वैशाख माह की अमावस्या मनाई जाएगी. इस दिन पितृ तर्पण, स्नान और दान का विशेष महत्व है. वहीं, दक्षिण भारत में इस दिन को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है. इस वर्ष यह अमावस्या 27 अप्रैल को पड़ रही है. दक्षिण भारत में शनि जयंती भी इसी दिन मनाई जाएगी. इस दिन शनि भगवान की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और कुछ विशेष उपाय करने से साढ़ेसाती और ढैय्या के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है.”
शनि जयंती के दिन करें ये उपाय
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि शनि जयंती के दिन इन उपायों को करने से शनि के नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है.
काला तिल का उपाय: एक मुट्ठी काला तिल लें और उसे अपने शरीर के चारों तरफ घुमाएं. इसके बाद उसे बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें. ऐसा करने से शनि के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है.
सरसों तेल और सिक्के का उपाय: शनि जयंती के दिन किसी शनि मंदिर जाएं. वहां सरसों का तेल और एक सिक्का ले जाएं. सिक्के पर सरसों के तेल से एक बिंदी बनाएं और उस सिक्के को शनि मंदिर में ही रख दें. ध्यान रहे कि यह उपाय करते समय आपको कोई देखे नहीं.
पीपल के पेड़ के नीचे दीपक: पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक अवश्य जलाएं. यह शनि देव को प्रसन्न करने का एक महत्वपूर्ण उपाय है.
शनि देव को तेल से स्नान: शनि जयंती के दिन शनि मंदिर जाकर शनि देव को सरसों के तेल से स्नान कराएं. साथ ही, उस तेल को अपने सिर पर भी अवश्य लगाएं.