सीकर:- 28 फरवरी से 11 मार्च तक चलने वाले खाटू मेले को लेकर लगातार तैयारी जारी है. इस बीच श्याम भक्तों के लिए यह दुविधा उत्पन्न हो गई है. 28 फरवरी से शुरू होने वाले मेले में इस बार मंदिर कमेटी की तरफ से प्रेस नोट जारी किया गया है, जिसमें बताया गया है कि 27 फरवरी की रात 10 बजे से 28 फरवरी की शाम 5 बजे तक मंदिर में श्रृंगार और अन्य कार्यों के कारण पट बंद करने का निर्णय लिया गया है. ऐसे में बड़ी संख्या में आने वाले श्याम भक्तों को परेशानी झेलनी पड़ेगी. जाहिर है कि इस बार बाबा श्याम के फाल्गुन लक्खी मेले के पहले भक्तों को भगवान दर्शन नहीं देंगे. यानी, खाटूश्याम जी मंदिर के कपाट बंद रहेंगे.
यह लिखा गया है पत्र में : आवश्यक सूचना का जिक्र करते हुए श्री श्याम मंदिर कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि दिनांक 28 फरवरी 2025 को श्री श्याम बाबा की विशेष सेवा-पूजा और तिलक होने के कारण श्री श्याम प्रभु के दर्शन दिनांक 27 फरवरी 2025 को रात्रि 10:00 बजे से दिनांक 28 फरवरी 2025 शाम 5:00 बजे तक आम दर्शनार्थियों के लिए बंद रहेंगे. मंदिर कमेटी ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वह इस समय अवधि के बाद ही दर्शन के लिए पहुंचे, जिससे अन्य व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाया जा सके.
मंदिर प्रबंधन जुटा तैयारी में : श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह ने बताया कि मंदिर नियमों के अनुसार अमावस्या के बाद श्री श्याम प्रभु की विशेष पूजा होगी. जिसके चलते खाटूश्याम जी फाल्गुन लक्खी मेले पहले दिन बाबा श्याम भक्तों को दर्शन नहीं देंगे. 28 तारीख की शाम के बाद ही बाबा श्याम का फाल्गुन लक्खी मेला भी शुरू होगा. श्री श्याम मंदिर कमेटी ने पत्र जारी कर सभी श्याम श्रद्धालुओं से मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्याम के दर्शन के लिए आने का अनुरोध किया है.
विदेशों से लाए फूलों से सजेगा बाबा का दरबार : फाल्गुनी मेले के लिए इस बार अलग थीम से श्याम दरबार को सजाया जाएगा. मंदिर की सजावट में आठ से ज्यादा देशों के 85 तरह के फूलों से श्याम दरबार को सजाया जाएगा. सजावट के काम में जुटी कंपनी के निदेशक अविराम पात्रा ने बताया कि मंदिर की सजावट में हॉलैंड, साउथ अफ्रीका, कोलंबिया, न्यूजीलैंड, चीन, इटली व बैंकॉक के फूलों के साथ भारत के 65 तरह के फूल सजावट में काम लिए जाएंगे.
यह है श्याम अवतार की पौराणिक कथा : हारे के सहारे बाबा श्याम को भगवान कृष्ण का अवतार माना जाता है. महाभारत युद्ध के दौरान भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों की तरफ से युद्ध में शामिल होने जा रहे थे. बर्बरीक के पास तीन ऐसी तीर थे, जो पूरे युद्ध को पलट सकते थे. इसी को लेकर भगवान कृष्ण ने ब्राह्मण का रूप में आए और उनसे शीश दान में मांग लिया. बर्बरीक ने भी बिना संकोच किया भगवान कृष्ण को अपना शीश दान में दे दिया. तब भगवान कृष्ण ने प्रसन्न होकर बर्बरीक को कहा कि बर्बरीक तुम्हें कलयुग में श्याम के नाम से पूजे जाओगे, तुम्हें लोग मेरे नाम से पुकारेंगे और तुम अपने भक्तों के हारे का सहारा बनोगे.