मेरठ। जिला एवं महानगर की टीमों में अपने करीबियों को पद दिलाने के लिए जनप्रतिनिधियों ने पूरी ताकत लगा दी है। चेहरों के चयन एवं चुनाव में उनके उपयोग को लेकर जिलाध्यक्षों की कड़ी परीक्षा होगी।
महामंत्री पर पार्टी चल सकती है दलित कार्ड
पश्चिम क्षेत्र के अध्यक्ष सतेंद्र सिसौदिया के सामने 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी को बेहतर परिणाम देने की चुनौती है। पश्चिम उप्र के समीकरण प्रदेशभर में सबसे जटिल माने जाते हैं, ऐसे में संगठन का नट बोल्ट कसने पर सर्वाधिक फोकस है। क्षेत्रीय टीम में आंशिक बदलाव ही होगा, लेकिन ठाकुर अध्यक्ष होने से महामंत्री हरीश ठाकुर का समीकरण उलझ सकता है।
पार्टी इस बार महामंत्री पद पर दलित कार्ड चलते हुए उपाध्यक्ष हरेंद्र जाटव को प्रमोट कर सकती है। महामंत्रियों में मुरादाबाद के हरिओम शर्मा और हापुड़ के विकास अग्रवाल पद पर बने रह सकते हैं।
गाजियाबाद के केके शुक्ला क्षेत्रीय टीम में उपाध्यक्ष थे जो बाद में बसपा से विधानसभा चुनाव लड़ गए। बेशक वो पार्टी में वापसी कर चुके हैं, लेकिन संगठन में दोबारा पद मिलने की ज्यादा गुंजाइश नहीं है। एक अन्य क्षेत्रीय उपाध्यक्ष वसंत त्यागी को प्रदेश मंत्री बनाया गया, ऐसे में उपाध्यक्ष के दो पद खाली हैं। इनकी जगह क्षेत्रीय सह कोषाध्यक्ष एवं बुलंदशहर निवासी हिमांशु मित्तल और प्रदेश प्रवक्ता महामेधा नागर का नाम आगे है।
जिलाध्यक्षाें को साधने की कोशिश
मेरठ महानगर में चार में से तीन महामंत्रियों का समीकरण बिगड़ने से इनकी जगह नए चेहरों की तलाश है। दूसरी पारी में उतरे अध्यक्ष सुरेश जैन ऋतुराज के लिए अनुभवी एवं सिफारिशी चेहरों में से एक चुनने की कड़ी चुनौती है।
जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा की टीम में दो महामंत्री और कई उपाध्यक्ष बदले जा सकते हैं। दो खेमों के आपसी टकराव के बीच खड़े राणा की असली परीक्षा है। उन्हें अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए नए चेहरों को जोड़ना होगा।
‘चुनाव सामने है ऐसे में संगठन की भूमिका और महत्वपूर्ण बन गई है। आंशिक बदलाव ही होंगे। सभी फैक्टर का ध्यान देते हुए पदाधिकारी बनाए जाएंगे।
