उज्जैन. पंचांग के अनुसार, एक महीने में कुल 16 तिथियां होती हैं। इनमें से एक से लेकर चतुर्दशी तिथि तक की तिथि दोनों पक्षों (शुक्ल और कृष्ण) में एक जैसी होती है। शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या कहते हैं। एक साल में कुल 12 अमावस्या तिथि होती हैं। इस तिथि के स्वामी पितृ देवता हैं। इस तिथि का महत्व कई धर्म ग्रंथों में मिलता है। चैत्र मास की अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या कहते हैं। इस अमावस्या का ये नाम होने के पीछे कई कारण हैं।
आज हम आपको भूतड़ी अमावस्या से जुड़ी कुछ खास बातें बता रहे हैं जो इस प्रकार है…उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, इस बार चैत्र मास की अमावस्या 21 मार्च को है। इसे ही भूतड़ी अमावस्या कहते हैं। मंगलवार को होने से ये भौमवती अमावस्या भी कहलाएगी। ग्रहों और नक्षत्रों के संयोग से इस दिन शुभ, शुक्ल और सिद्धि नाम के 3 योग भी बन रहे हैं। इतने सारे शुभ योग होने से इस तिथि का महत्व और भी बढ़ गया है।वैसे तो साल में 12 अमावस्या होती है, लेकिन भूतड़ी अमावस्या साल में सिर्फ एक ही बार आती है।
इसे भूतड़ी नाम क्यों दिया गया, इसके पीछे कई कारण है। ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, इस तिथि पर देश के प्रमुख नदियों के तट पर मेलों का आयोजन किया जाता है। जिन लोगों पर ऊपरी बाधाओं का साया होता है, वे इस दिन नदी में स्नान करते हैं तो उनकी परेशानियों का निदान हो जाता है। भूत-प्रेत से संबंधित होने के कारण ही इसे भूतड़ी अमावस्या कहते हैं।भूतड़ी अमावस्या पर यहां लगता है मेलाभूतड़ी अमावस्या पर पवित्र नदियों के किनारे धार्मिल मेले लगते हैं, लेकिन सबसे बड़ा मेला नर्मदा किनारे धाराजी नामक स्थान पर लगता है।
यहां आने वाले अधिकांश लोग या तो प्रेत बाधा से पीड़ित होते हैं या ऐसे लोगों को लाने वाले होते हैं। इसके अलावा उज्जैन के बावन कुंड में भी ऐसे दृश्य देखने जा सकते हैं। कोई भी आम व्यक्ति ऐसे दृश्य देखकर डर सकता है।इन बातों का ध्यान रखें इस दिनभूतड़ी अमावस्या पर लोगों को कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए जैसे नदी किनारे बिना किसी खास काम के न जाएं। महिलाएं बाल खुले रखकर घर के बाहर न निकलें। इस दिन शराब या मांसाहार लेकर इधर-उधर न जाएं। श्मशान के निकट से न गुजरें, जरूरी हो तो भगवान का नाम लेते हुए जल्दी से निकल जाएं।