भोपाल: भारतीय जनता पार्टी ने तीन केंद्रीय मंत्रियों समेत सात सांसदों को चुनाव में उतारा है। इसके बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या केंद्र की राजनीति के चेहरे राज्य की सियासत में भी असर डालेंगे। साथ ही सत्ता विरोधी भावनाओं को नियंत्रित कर भाजपा को दो दशकों में पांचवी बार प्रदेश की सत्ता में पहुंचाएंगे?
विधानसभा चुनाव के लिए तीन केंद्रीय मंत्रियों समेत सात लोकसभा सांसदों को मैदान में उतारने के भाजपा के फैसले को प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में अपेक्षाकृत ज्यादा असर वाले चेहरों पर भरोसा कर खुद को मजबूत करने के प्रयास की तरह देखा जा रहा है। वहीं, विधानसभा चुनाव लड़ रहे तीन केंद्रीय मंत्री- नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदारों के रूप में भी देखे जा रहे हैं।
सत्तारूढ़ दल ने मौजूदा कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला के खिलाफ इंदौर-1 विधानसभा सीट से भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को मैदान में उतारा है। इन्हें भी मुख्यमंत्री पद का संभावित चेहरा माना जा रहा है।
किदवई के अनुसार, साफ लगता है कि भाजपा की जिला इकाइयों ने तोमर, विजयवर्गीय, पटेल और सांसदों के नामों की सिफारिश टिकटों के लिए नहीं की थी। उन्होंने कहा कि इन नेताओं को राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी को मजबूती देने के लिए भाजपा संसदीय बोर्ड की तरफ से चुना गया है।
किदवई ने कहा कि सवाल यह है कि क्या कोई मतदाता सिर्फ इसलिए अपनी प्राथमिकता बदल देगा। क्योंकि मौजूदा विधायक या स्थानीय दावेदार को नजरअंदाज कर उसकी जगह लोकसभा सदस्य को टिकट दिया गया है? इस रणनीति में ‘संदेश अधिक लेकिन सार कम’ नजर आता है।
पूर्व राज्य भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर मुरैना से मौजूदा लोकसभा सांसद हैं। वह दिमनी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर कांग्रेस ने एक बार फिर मौजूदा विधायक रविंद्र सिंह तोमर को टिकट दिया है।
