रायपुर: कई बार कुछ लोग छोटी-छोटी समस्याओं से हार मान जाते हैं। उन लोगों के लिए एक नेत्रहीन प्रोफेसर मिसाल साबित हो रहे हैं। सूरजपुर कॉलेज के यह सहायक प्रोफेसर जन्म से ही नेत्रहीन हैं। बावजूद इसके इन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि यदि आप में दृढ़ संकल्प है तो कोई भी बाधा आपको मंजिल पाने से नहीं रोक सकती है। आज हम आपको ऐसे ही उस प्रोफेसर के बारे में बताने जा रहे हैं जो समाज के लिए तो एक मिसाल हैं। साथ ही बच्चों के भविष्य की भी आस हैं।
नेत्रहीन सहायक प्रोफेसर बुधरामलैपटॉप डेज़- सेल 30 नवंबर को समाप्त होगी- 40% तक की छूट पाएं |दरअसल, बुधराम सूरजपुर के रेवती नारायण मिश्र कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं। यह अन्य प्रोफेसरों की तरह सामान्य इंसान नहीं हैं। बुधराम जन्म से ही नेत्रहीन हैं। बावजूद इसके उन्होंने अपनी नेत्रहीनता को अपनी कमजोरी बनाने की बजाय अपनी ताकत में तब्दील कर लिया। बचपन में ही उनके सर से पिता का साया उठ गया था। गांव के एक गरीब मां के साथ दोनों आंख से अंधा बच्चा।जिंदगी आसान नहीं थी। लोग बुधराम और उसकी मां को भीख मांग कर गुजारा करने की सलाह दिया करते थे।
ऐसी कई समस्याएं इस सहायक प्रोफेसर के जिंदगी मैं आईं, लेकिन इन्होंने सभी चुनौतियों का सामना करते हुए आज दूसरों के लिए एक मिसाल बन गए हैं। आज बुधराम अपनी जिंदगी सामान्य रूप से जी रहे हैं। आज उनके परिवार में इनकी बूढ़ी मां के साथ इनकी पत्नी और बच्चे भी हैं।Success Story: स्कूल जाने की उम्र में शुरू किया बिजनेस, 17 साल की उम्र में हैं ₹100 करोड़ की कंपनी के मालिकवहीं कॉलेज के अनुसार बुधराम अन्य प्रोफेसर की तरह ही सामान्य रूप से उन्हें पढ़ाते तो हैं ही, छात्रों के लिए वह प्रेरणा स्रोत भी हैं।
छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ ही जिंदगी में चुनौतियों से लड़ने की भी तालीम मिलती है। सभी छात्र बुधराम का काफी सम्मान करते हैं।पुरानी कहावत है कि ‘जहां चाह है वहां राह है’। इस कहावत को बुधराम ने सच साबित कर दिखाया है।
