नई दिल्ली :– पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक पारिवारिक अदालत द्वारा एक व्यक्ति के पक्ष में दिए गए तलाक के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि पति को ‘हिजड़ा’ कहना मानसिक क्रूरता के समान है। न्यायमूर्ति सुधीर सिंह और न्यायमूर्ति जसजीत सिंह बेदी की खंडपीठ इस साल जुलाई में पारिवारिक अदालत के फैसले के खिलाफ एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
पीठ ने कहा, “यदि हम पारिवारिक न्यायालय द्वारा दर्ज निष्कर्षों का विश्लेषण उच्चतम न्यायालय के निर्णयों के संदर्भ में करें, तो यह स्पष्ट है कि अपीलकर्ता-पत्नी के कृत्य और आचरण क्रूरता के बराबर हैं।” न्यायालय ने यह भी कहा कि पति को ‘हिजड़ा’ कहने और उसकी मां को यह बताने के लिए कि उसने ‘हिजड़े’ को जन्म दिया है, मानसिक क्रूरता का प्रतीक है।
आदेश में उल्लेख किया गया है, “पत्नी के समग्र आचरण पर विचार करते हुए और यह ध्यान में रखते हुए कि दोनों पक्ष पिछले छह वर्षों से अलग रह रहे हैं, न्यायालय ने पाया कि उनके संबंध इतने बिगड़ चुके हैं कि इन्हें सुधारना संभव नहीं है।” इन दोनों की शादी दिसंबर 2017 में हुई थी।
पति ने तलाक की अर्जी में आरोप लगाया कि पत्नी देर से उठती थी और उसकी मां से कहती थी कि वह भोजन ऊपर भेजें। इसके अलावा, उसने आरोप लगाया कि पत्नी अश्लील वीडियो देखने की आदी है और उसे ताना मारती थी। पत्नी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि पति कोई सबूत पेश नहीं कर सका। महिला ने अपने ससुराल वालों पर नशीले पदार्थ देने का भी आरोप लगाया, लेकिन यह साबित नहीं कर पाई। न्यायालय ने पति की मां की गवाही का भी हवाला दिया, जिसमें उसने कहा कि पति को पत्नी ‘हिजड़ा’ कहती थी।
न्यायालय ने कहा, “यह हमारा दायित्व है कि विवाह बंधन को बनाए रखा जाए, लेकिन जब विवाह अव्यवहारिक हो जाए, तो साथ रहने का आदेश देना उचित नहीं है।” अंत में, पीठ ने पारिवारिक अदालत के फैसले को वैध ठहराया और कहा कि यह किसी भी तरह से अवैधानिक नहीं है
