नई दिल्ली:- कांग्रेस इस बात से उत्साहित है कि मोदी सरकार के जाति जनगणना कराने के फैसले से राहुल गांधी के सामाजिक न्याय के एजेंडे को बल मिला है. जाति की गणना आगामी मुख्य जनगणना का हिस्सा होगी. राहुल गांधी ने मोदी सरकार के इस कदम का स्वागत किया और कहा कि यह सामाजिक न्याय की दिशा में एक शुरुआती कदम है. उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि सर्वेक्षण कब तक किया जाएगा.
राहुल गांधी पहली बार 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद संसद के निचले सदन में विपक्ष के नेता बने. वह पिछले कुछ वर्षों से जाति जनगणना की मांग कर रहे थे, लेकिन भाजपा इसका विरोध कर रही थी. भगवा पार्टी का कहना था कि यह विचार विभाजनकारी है क्योंकि इसे शहरी नक्सलियों का समर्थन प्राप्त है.
हालांकि, राहुल गांधी लगातार अपनी मांग दोहराते रहे और कहा कि जनसंख्या संरचना के ठोस आंकड़ों के आधार पर सामाजिक न्याय की नीतियां बनाने के लिए जाति जनगणना की जरूरत है. मूल विचार अन्य पिछड़े वर्गों पर ध्यान केंद्रित करना था, जिनके बारे में राहुल का कहना है कि उन्हें व्यवस्था में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है.
राहुल ने 2023 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस मुद्दे को उठाया था और उसी साल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जाति जनगणना की मांग की थी. 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के घोषणापत्र में भी जाति जनगणना करना का वादा किया गया था.
संसद के बजट सत्र के दौरान राहुल ने कहा था कि वह सुनिश्चित करेंगे कि जाति जनगणना विधेयक जल्द ही सदन में पारित किया जाए. हाल ही में, कांग्रेस के अहमदाबाद अधिवेशन में पारित प्रस्ताव में भी इस मुद्दे को शामिल किया गया.
इसके अलावा, तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में हाल ही में जाति जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ओबीसी को 42 प्रतिशत आरक्षण देने वाला विधेयक पारित किया है. जातिगत सर्वेक्षण के लिए प्रश्न तैयार करने में राहुल ने भी भूमिका निभाई थी.
राहुल गांधी ने हाल ही में बिहार में भी इस मुद्दे का जिक्र किया, जहां इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. उन्होंने कहा कि राज्य में पहले किया गया जातिगत सर्वेक्षण त्रुटिपूर्ण था और अगर इंडिया गठबंधन सत्ता में आया तो वह नई जाति जनगणना कराएगा.
हालांकि राहुल गांधी अपनी मांग को लेकर लगातार चर्चा करते रहे, लेकिन कांग्रेस के भीतर यह धारणा थी कि मोदी सरकार उनकी मांग कभी नहीं मानेगी. लेकिन 30 अप्रैल को केंद्र सरकार की जाति जनगणना कराने की अचानक घोषणा से पार्टी नेताओं में जोश भर गया और उन्होंने इस मांग को उठाने का श्रेय राहुल को दिया.
मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी सचिव चंदन यादव ने ईटीवी भारत से कहा, “यह राहुल गांधी की जीत है, जिन्होंने जाति जनगणना की लड़ाई शुरू की थी. भाजपा ने उनका मजाक उड़ाया था, लेकिन अब उन्हें इस मुद्दे के महत्व का अहसास हो गया है. इससे पहले, कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने जाति जनगणना की थी, लेकिन इसके आंकड़े प्रकाशित नहीं कर सकी थी. जब 2014 में मोदी सरकार सत्ता में आई, तो उन्होंने भी डेटा प्रकाशित नहीं किया. लेकिन आज उन्होंने उनके सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. यह कांग्रेस की वैचारिक जीत भी है.”
उन्होंने कहा, “यह राहुल गांधी ही थे जिन्होंने तेलंगाना में जाति जनगणना को आगे बढ़ाया और बाद में यह सुनिश्चित किया कि अन्य पिछड़े समूहों के लाभ के लिए उचित आरक्षण का कानूनी प्रावधान किया जाए. अगर बिहार में इंडिया ब्लॉक जीतता है तो हम इसी तरह का सर्वेक्षण कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं.”
राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी सचिव एसएस रंधावा के अनुसार जाति जनगणना एक आम मुद्दा है और यह देश की हकीकत बन चुका है. रंधावा ने ईटीवी भारत से कहा, “राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाया और सड़कों पर, संसद में और चुनावों के दौरान इसके लिए लड़ाई लड़ी. यह अब आम जनता का मुद्दा बन चुका है और लोगों की आवाज के रूप में सामने आ रहा है.”
आंध्र प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी मणिकम टैगोर ने ईटीवी भारत से कहा, “मैं बहुत खुश हूं. यह हमारे नेता की जीत है, जिन्होंने अपने करीबी मुद्दे को नहीं छोड़ा. यह अच्छा है कि सरकार में बेहतर समझ बनी और उन्होंने राहुल गांधी की बात सुनी.