कवर्धा: – छत्तीसगढ़ के कवर्धा में दो सिद्धपीठ मंदिर और एक देवी मंदिर से खप्पर निकाला जाता है. देवी मंदिरों से खप्पर निकालने की यह परंपरा वर्षों पुरानी है. नवरात्रि की महाअष्टमी पर रात करीब 10.30 बजे से ही माता की सेवा में लगे पण्डों द्वारा परंपरा के मुताबिक 7 काल 182 देवी देवता और 151 वीर बैतालों को मंत्रोच्चारण के साथ आमंत्रित कर अग्नि से प्रज्ज्वलित मिट्टी के पात्र में विराजमान किया जाता रहा है है. हालांकि अब 108 नींबू काटकर रस्में पूरी की जाती है.
कवर्धा में खप्पर परंपरा: मध्य रात्रि ठीक 12 बजे सकरी नदी के घाट पर स्नान के बाद आदिशक्ति देवी की मूर्ति के सामने बैठकर पंडों से श्रृंगार करवाया जाता है. इसके बाद देवांगन पारा स्थित मां चण्डी मंदिर, मां परमेश्वरी मंदिर से खप्पर निकाली जाएगी.
आधी रात को खप्पर देखने उमड़ती है भीड़: मध्यरात्रि 12.10 बजे पहला खप्पर अगुवान की सुरक्षा में निकलेगा. विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए मोहल्लों में स्थापित 18 मंदिरों के देवी-देवताओं का विधिवत आह्वान किया जाएगा. अगुवान उस शख्स को कहते हैं, जो खप्पर के आगे आगे दाहिने हाथ में तलवार लेकर चलता है. मान्यता है कि खप्पर का मार्ग अवरूद्ध होने पर वह तलवार से वार करता है. खप्पर के पीछे पीछे पण्डों का एक दल पूजा अर्चना करते हुए साथ रहता है.
बुजुर्ग बताते हैं कि पांच दशक से भी पहले काफी रौद्ररूप में खप्पर निकाली जाती थी. दर्शन करना तो बहुत दूर की बात थी, उनकी किलकारी की गूंज मात्र से बंद कमरे में लोग दहशत में आ जाते थे. लेकिन दरवाजों और खिड़कियों से लोग दर्शन जरुर करते थे.
दूर दूर से आते हैं श्रद्धालु: अष्टमी की रात्रि कवर्धा शहर में मेला जैसा माहौल रहता है. रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, दुर्ग, मुंगेली और मंडला जिलों से भी लोग खप्पर देखने के लिए पहुंचे हैं.
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: खप्पर यात्रा को लेकर पुलिस प्रशासन सतर्क है. थाना परिसर में पुलिस विभाग ने विशेष बैठक बुलाई, जिसमें खप्पर निकलने के दौरान तैयारी और व्यवस्था पर चर्चा की गई. पुलिस ने कहा है कि आपराधिक तत्वों को चिन्हांकित कर हिरासत में लेकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.