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    Home » नक्सलवाद के खात्मे का काउंटडाउन, सुप्रीम कोर्ट का दखल से इनकार, सरकार बोली हथियार छोड़ने पर ही बात…
    RAIPUR

    नक्सलवाद के खात्मे का काउंटडाउन, सुप्रीम कोर्ट का दखल से इनकार, सरकार बोली हथियार छोड़ने पर ही बात…

    By Tv 36 HindustanApril 13, 2025No Comments13 Mins Read
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    रायपुर :- पूरे देश से नक्सलवाद के सफाए को लेकर जिस तरीके की चर्चा और निर्णय पिछले एक सप्ताह में हुई हैं वो 2026 तक नक्सलियों के खात्मे के लिए चलाए जा रहे अभियान में बहुत बड़ी रणनीति का हिस्सा बना है. 8 अप्रैल से लेकर अब तक देश में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे मुहिम को और मजबूत करने का बल मिला है. बात चाहे सुप्रीम कोर्ट की हो या फिर केंद्र सरकार के दावों की या फिर राज्य में चल रहे ग्राउंड जीरो पर नक्सलियों से निपटने के अभियान का.पूरा देश अब नक्सल मुक्त भारत की कल्पना को साकार करने में जुट गया है. इसमें सिर्फ बंदूक ही नहीं पुनर्वास की सिफारिश से भी हैं. शांति के प्रयास के लिए चल रहे ग्राउंड जीरो पर होने वाले काम को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का भी. जो अपने आप में बताती है कि देश नक्सली के नासूर से बाहर निकालने के लिए कृत संकल्पित हो चुका है.

    नक्सल विरोधी अभियान को रोकने की कोशिश : छत्तीसगढ़ में चल रहे नक्सल अभियान और उसको लेकर राजनीतिक रोटी सेकने की कवायत में कुछ लोग कोर्ट में सहानुभूति की प्रक्रिया लेकर पहुंच जाते हैं. जिसमें सुरक्षा एजेंसियों पर कई आरोप भी लगा दिए जाते हैं. छत्तीसगढ़ में चल रहे नक्सलियों के खिलाफ अभियान में 2018 में सुकमा में सुरक्षा बलों के साथ हुए एनकाउंटर में जो लोग मारे गए थे उसको लेकर एक पीआईएल सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी. 9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में इस पीआईएल पर सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच जिसे जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की अदालत में सुना गया. इसमें सुनवाई के दौरान आरोप लगाया गया था कि सुरक्षा बल ने एनकाउंटर में 15 आदिवासियों की हत्या की है जिस पर मुकदमा चलाया जाए. हालांकि सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट के सामने यह पक्ष रखा कि जो भी आरोप लगाए गए हैं वह निराधार हैं. सुरक्षा एजेंसियों के साथ जो लोग मुठभेड़ में मारे गए हैं वह सभी इनामी नक्सली थे. जो भी दावा किया गया है वह झूठा है.

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा दखल नहीं देंगे : इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में शांति बहाली की प्रक्रिया चल रही है. लगातार नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं. ऐसे में शांति के लिए चल रहे प्रक्रिया में हम अनावश्यक रूप से दखल नहीं देंगे. इस तरह के मुकदमे शांति व्यवस्था के लिए चलाई जा रही प्रक्रिया में बाधा पैदा करते हैं. इलाके में शांति आ रही है ऐसे में इस तरह की अनावश्यक रूप से चीजों को करने का कोई औचित्य नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने पीआईएल खारिज कर दिया. मामला साफ है नक्सल के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में अब वैसे लोगों को भी बहुत राहत नहीं मिलने जा रही है जो राजनीतिक या फिर अपने फायदे की रोटी सकते थे.

    पीएम बोले युवा विकास में पिछड़ गए : देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 अप्रैल को एक निजी टीवी चैनल के लिए हुए कॉन्क्लेव ने कहा कि पूर्वोत्तर में नक्सलियों के चलाए जा रहे अभियान में युवाओं को विकास के मुख्य धारा में पीछे छोड़ दिया. पूर्वोत्तर में नक्सलवाद से निपटने और शांति को बढ़ावा देने के लिए ज्यादा और प्रभावी काम करने की जरूरत है. पीएम मोदी ने कहा कि दौर था जब देश के 125 से अधिक जिले नक्सल हिंसा की चपेट में थे. ये ऐसे जिले थे जहां से सरकार के संविधान वाली सीमाएं समाप्त हो जाती थी और नक्सलवाद की सीमा शुरू हो जाती थी. देश के विकास में जो युवा अपना योगदान देना चाहते थे बड़ी संख्या में वही युवक नक्सलवाद के शिकार हुए. अब ऐसे लोग समाज के मुख्य धारा से जुड़ रहे हैं और पिछले एक दशक में 8000 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. हिंसा का रास्ता छोड़कर देश को विकास की डगर पर ले जाने की जो कवायत शुरू हुई थी उसका परिणाम है कि पहले देश में 125 जिले नक्शा प्रभावित थे जो अब घटकर महाराज 20 हो गए हैं.पूर्वोत्तर राज्य दशकों तक अलगाववाद और हिंसा का दंश झेला है.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले 10 सालों में हम तक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जिसके परिणाम स्वरुप 10000 से ज्यादा युवा हथियार छोड़कर विकास के मार्ग पर चले हैं.उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाके का वर्तमान और भविष्य को बचाना जरूरी है.इसमें सबसे बड़ा योगदान युवाओं का है जो अब देश के निर्माण के लिए काम कर रहे हैं किसी भी विकसित देश के लिए युवाओं का मूल धारा से भटक कर जाना उसे देश की नीम को कमजोर करता है अब पूर्वोत्तर भी विकास की राह पर तेजी से चल रहा है और यहां के युवा विकास में अपनी मजबूत भूमिका भी निभाएंगे.

    हर हाल में नक्सल खत्म होगा : केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने 10 अप्रैल को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि देश से हर हाल में नक्सलवाद को खत्म किया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अध्यक्षता में चल नहीं सरकार ने नक्सलियों के खात्मे की समय सीमा तय कर दी है. उन्होंने कहा कि जो लोग समाज के मुख्य धारा से भटक गए हैं हम उनसे यह निवेदन कर रहे हैं वह समाज की मुख्य धारा से जुड़े. देश के विकास में अपनी महिती भूमिका अदा करें . क्योंकि बंदूक से किसी देश या समाज का विकास नहीं होता है. उन्होंने कहा कि सिर्फ बंदूक ही नक्सल समस्या का समाधान नहीं है. पूरे देश में नक्सलियों के पुनर्वास की नीति भी चलाई जा रही है. राज्य सरकारें उस पर काम भी कर रही हैं. हम समाज की मुख्य धारा से भटके हुए लोगों से अपील कर रहे हैं देश के मुख्य धारा में शामिल होकर देश का विकास करें. लेकिन यह भी तय है जो लोग बंदूक नहीं छोड़ेंगे उनको बंदूक से ही जवाब दिया जाएगा.लेकिन नक्सलबाद से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा.

    बंदूक छोड़िए फिर होगी बात- 11 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि जो नक्सली सरकार से बातचीत करना चाहते हैं उनके लिए सीधी और सटीक बात ये है कि सबसे पहले बंदूक छोड़कर आत्मसमर्पण करें.उसके बाद हम उनसे बात करने को तैयार हैं. देश और समाज के विकास में उनके जो भी सुझाव होंगे हम उसे हर हाल में स्वीकार करेंगे. वास्तव में नक्सली संगठन ने एक पत्र भेजकर विजय शर्मा से अपील किया था कि वह बातचीत करना चाहते हैं. इसी बात को लेकर के विजय शर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए संवाददाताओं से यह साफ कहा कि वह समय अब निकल गया है. पहले की तरह आइए बैठिए और चाय पीजिए वाली कहानी चलती थी वह अब नही होगा.

    अब कोई भी बात तभी होगी जब नक्सली आत्मसमर्पण करेंगे. समाज के मुख्य धारा से जुड़ेंगे उसके बाद उनकी जो भी मांग होगी हम चर्चा करने को तैयार है. साथ उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलियों के पुनर्वास की नीति को चल रही है.आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार सुविधा भी दे रही है.ऐसे में वह निवेदन करते हैं कि बंदूक छोड़कर वह समाज के मुख्य धारा से जुड़े. सरकार उन्हें हर सहायता देने को तैयार है. हालांकि विजय शर्मा ने यह भी कहा कि जब तक बंदूक छोड़ने पर अमल नहीं होगा सरकार किसी तरह की बात नहीं करेगी.

    120 दिन में होगा पुनर्वास यह गारंटी है : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नक्सलवाद आत्मसमर्पण नीति ने विकास के द्वारा खोले हैं. हिंसा छोड़ने वालों को सम्मानजनक जीवन जीने की पूरी व्यवस्था राज्य सरकार देगी. जो भी नक्सली आत्मसमर्पण करेंगे. उन्हें 120 दिनों के भीतर पुनर्वास की व्यवस्था दी जाएगी और यह सरकार की गारंटी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग आत्मसमर्पण करेंगे उन्हें ट्रांजिट कैंप या पुनर्वास केंद्र में रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में जिसकी रुचि होगी उसे उसे विधा में प्रशिक्षित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं 3 साल तक हर महीने 10000 रुपए का मानदेय भी दिया जाएगा. इसके अलावा शहरी इलाकों में प्लॉट, ग्रामीण क्षेत्र में कृषि योग्य भूमि, स्वरोजगार और व्यवसाय से जोड़ने के लिए व्यवस्था दी जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि सारी चीज 120 दिनों के भीतर पूरी की जाएंगे और यह सरकार की गारंटी है.

    नक्सलियों से सीएम की अपील : सीएम ने कहा कि मैं यह निवेदन करता हूँ कि जो लोग भी समाज के मुख्य धारा से भटके हैं वैसे नक्सली समर्पण करके बेहतर जीवन जीए. क्योंकि विकास तभी संभव है जब लोग हिंसा छोड़ेंगे. क हिंसा से कुछ भी नहीं होना है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य और जिला स्तर पर गठित समितियां द्वारा आत्म समर्पण के प्रत्येक प्रकरण की नियमित समीक्षा की जा रही है. इसमें सुनिश्चित हो रहा है कि जो लोग भी आत्मसमर्पण कर रहे हैं उनके जीवन को सकारात्मक तरीके से मजबूत किया जाए ताकि वह समाज की मुख्य धारा से जुड़कर बेहतर काम कर सकें.

    हथियार डालो लाखों पाओ- 12 अप्रैल को छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलवादी आत्म समर्पण पीड़ित राहत पुनर्वास नीति 2025 को लेकर ऐलान किया.जिसमें नई नीति के साथ हथियारों को लेकर आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को लाखों रुपए सहायता राशि का प्रावधान किया गया है. इसके तहत लाइट मशीन गन के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को 5 लाख का मुआवजा मिलेगा. एके-47 त्रिची एसॉल्ट राइफल पर 4 लाख दिया जाएगा. मोर्टार के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को ढाई लाख रुपए, एसएलआर और इंसास राइफल पर 2 लाख दिए जाएंगे. वहीं एक्स 95 एसॉल्ट राइफल एमपी 9 टेक्टील पर डेढ़ लाख रुपये दिए जाएंगे.

    थ्री नॉट थ्री राइफल पर एक लाख रुपए, एक्स कैलिबर पर 75000 और यूबीजीएल अटैचमेंट पर 40 हजार रुपए दिए जाएंगे. 315 और 312 बोर के बंदूक पर तीस हजार मिलेंगे. गलोक पिस्टल पर ₹30000 के साथ अन्य छोटे हथियार जैसे कारबाइन, वाल्वर, वायरलेस , डेटोनेटर के साथ आत्मसमर्पण करने वाले को सरकार प्रोत्साहन की राशि देगी. इसके अलावा आत्मसमर्पणकर्ता नक्सली भले ही उसके पास हथियार हों या न हों, उसे 50 हजार रूपए की नगद प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.

    जारी किए गए निर्देश के अनुसार यदि कोई आत्मसमर्पित नक्सली, नक्सलियों द्वारा छिपाए गए.आईईडी या विस्फोटकों की सूचना देकर उन्हें बरामद कराता है, तो उसे 15 हजार से 25 हजार तक की अतिरिक्त राशि दी जाएगी. बड़े हथियार डंप या विस्फोटक सामग्री की जानकारी देने पर एक लाख तक का इनाम मिलेगा. आत्मसमर्पणकर्ता यदि विवाह करने के इच्छुक हैं तो उसको एक लाख की विवाह अनुदान राशि भी दी जाएगी. यदि पति और पत्नी दोनों आत्मसमर्पित नक्सली हैं, तो उन्हें एक इकाई मानते हुए यह लाभ दिया जाएगा.

    निवेदन और जंग दोनों जारी है : छत्तीसगढ़ से नक्सली सफाई को लेकर सरकार की तरफ से लगातार अनुरोध किया जा रहा है. साथ ही यदि कोई नक्सली आत्मसमर्पण करता है तो उसके लिए पुनर्वास की नीति को भी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है. यदि कोई बंदूक लेकर आता है तो उसके लिए क्या धन राशि उसे दी जाएगी.उसके लिए भी सरकार ने स्पष्ट दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं. साथ में ये भी कह दिया है कि ट्रांजिट कैंप में उन्हें रखकर उनके हुनर के अनुसार उनका तैयार किया जाएगा. सरकार का यह पहल निश्चित तौर पर समाज से भटके हुए लोगों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का है. लेकिन उसके बाद भी पिछले एक सप्ताह में नक्सलियों ने कायराना हरकत को अंजाम देने में पीछे नहीं रहे हैं. बस्तर डिवीजन में हुए आईईडी ब्लास्ट में एक जवान घायल हुआ, हालांकि उसके बाद नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में 12 अप्रैल को ही तीन नक्सलियों को मार गिराया गया.

    नक्सल अभियान और तेज होगा : बस्तर डिवीजन के आईजी सुंदरराज पी ने यह कहा है कि नक्सलियों के लिए सरकार के द्वारा कई सहायता दी जा रही है. निवेदन भी किया जा रहा है कि वह समाज की मुख्य धारा से जुड़े. हालांकि नक्सलियों ने पत्र जारी कर ये भी कहा है उन्होंने कई स्थलों पर आईडी बम लगा रखे हैं. जहां गांव वालों को नहीं जाने की अपील की गई है.लेकिन इसके बाद भी बस्तर रेंज के आईजी का कहना है कि नक्सल के खिलाफ जारी अभियान और तेज होगा.

    वरिष्ठ पत्रकार दुर्गेश भटनागर के मुताबिक विगत चार दशक से वहां विकास नहीं हुआ है. जो नक्सल बस्तर में है वह नक्सल बंदूक के बल पर खड़ा हुआ है.अब सरकार बंदूक के बल पर ही नक्सली को समाप्त करने की पुरानी परिपाटी को छोड़कर पुनर्वास की जिस नीति को लेकर आई है वो निश्चित तौर पर बहुत बड़ी पहल है. यह नक्सल की सफाई, क्षेत्र का विकास और वहां पहुंचे रोजगार को नए भारत के निर्माण के तहत देख सकती है.लेकिन जरूर यह है कि सरकार जो बात कर रही है.वह ईमानदारी से नक्सल प्रभावित उस गांव तक पहुंचे जो आज भी विकास के मुख्य धारा में बहुत पीछे है.

    दुर्गेश भटनागर ने कहा कि मैं मानता हूं कि सरकार की यह पहला बहुत बड़ी है.जहां तक माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले के सुनवाई न करने की बात है यह सर्वोच्च न्यायालय की अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर तय की गई बात है. इस पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की जा सकती है. किंतु सर्वोच्च न्यायालय हर चीज को देश के विकास और समाज की जरूरत के अनुसार ही देखा है माननीय न्यायाधीशों ने जिस तरीके का निर्णय लिया है वह निश्चित तौर पर नक्सल की समाप्ति के तरफ बढ़ाया गया एक बड़ा कदम है. और वैसे लोगों को भी से सीख लेनी चाहिए, और उन्हें सोचना भी चाहिए तो यदि कोर्ट इस तरह की टिप्पणी कर रहा है तो समय आ गया है कि नक्सल को हर तरीके से ना कह दिया जाए.

    31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद के सफाए को लेकर चल रहे अभियान में इस साल की शुरुआत के पहले हफ्ते में ही छत्तीसगढ़, केंद्र सरकार और न्यायपालिका में सर्वोच्च न्यायालय ने जिस तरीके का रुख दिखाया है उसे एक बात को साफ है कि देश से नक्सल के नासूर न को समाप्त करने के लिए सभी लोगों ने कमरकस ली है. बात व्यवस्थापिका की हो, कार्यपालिका की या फिर न्यायपालिका की. लोकतंत्र के सभी स्तंभ अब इस बात को मानकर चल रहे हैं कि देश का विकास तभी संभव है जब देश से नक्सल समाप्त हो.

    कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि नक्सल समाप्ति के 1 साल के अंतिम लड़ाई के अभियान का शुरुआती हफ्ता ही नक्सलियों के लिए कई मामलों में सौगात वाला भी है. क्योंकि पुनर्वास नीति को जिस तरीके से छत्तीसगढ़ की सरकार ने रखा है वो नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने और राज्य के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा. नक्सलियों ने पत्र देकर छत्तीसगढ़ सरकार से जिस वार्ता की बात कही थी वो इस बात को दर्शाता है कि नक्सली चलाए गए अभियान से डरे हुए हैं. सरकार का मजबूत पक्ष ये भी है वो नक्सलियों से सिर्फ एक ही शर्त पर बात करना चाहती है वह बंदूक का रास्ता छोड़े और समाज के मुख्य धारा से जुड़े. सरकार ने 1 साल में नक्सल मुक्त भारत का जो संकल्प लिया है उसका आगाज बहुत धमाकेदार है. अब देखना है नक्सली इसे अपने लिए किस अंजाम के तौर पर देखते हैं. अब तो समर्पण और नक्सल को ना ही सिर्फ एक और अंतिम विकल्प है.

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