यूपी:– विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन के बाद से सियासी पारा हाई है। पहले ब्रजेश पाठक ने मुलायम सिंह यादव पर टिप्पणी की, जिसके बाद समाजवादी पार्टी के विधायकों ने जमकर बवाल किया। उसके बाद नेता सदन यानी सीएम योगी ने महाकुंभ पर बोलते हुए विपक्षी नेताओं पर कटाक्ष करते हुए सुअर और गिद्ध जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
योगी आदित्यनाथ ने नाम तो किसी का नहीं लिया, लेकिन उनका कटाक्ष पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर ही था। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि सपा सुप्रीमों लगातार महाकुंभ की सफाई व्यवस्था व भगदड़ के मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधते रहे। हालाकि इस सूची में कई लालू यादव, ममता बनर्जी व मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे अन्य विपक्षी नेताओं का नाम भी है।
अब अखिलेश यादव ने अपनी स्टाइल में योगी आदित्यनाथ पर पलटवार करते हुए नसीहत दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि “…लेकिन महाकुंभ में जिन्होंने अपनों को तलाशा उन्हें न तो अपने उन परिवारवालों का नाम मृतकों की सूची में मिला, जो हमेशा के लिए खो गये और न ही खोया-पाया के रजिस्टर में। कुछ लोगों ने महाकुंभ में राजनीतिक अवसरवाद को तलाशा और उनको आत्मप्रचार का माध्यम मिला लेकिन उन्होंने अपनी नैतिकता, सत्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनाओं को खो दिया और वाणी पर संतुलन को भी।”
“अशोभनीय कथनों का उच्चारण बताता है कि मानसिकता जब नकारात्मकता के चरम पर होती है तो देश, काल, स्थान की गरिमा का ख़्याल न करते हुए शब्दों के रूप में प्रकट होती है। ‘महाकुंभ’ जैसे पावन-पवित्र धार्मिक-आध्यात्मिक पर्व के संबंध में बोलते समय शब्दों का चयन, इस अवसर के मान और प्रतिष्ठा के अनुकूल होना चाहिए। महाकुंभ में कई बार जाकर भी जिनका वैचारिक उद्धार नहीं हुआ, उनके पाप और पतन की सीमा भला कौन नाप सकता है। ऐसे कथनों से जिन सुधीजनों को ठेस पहुँची है, उनसे निवेदन है कि ऐसे लोगों के प्रति सहानुभूति की भावना रखें न कि आक्रोश की।…सन्मति दे भगवान!”
