बालोद:- बालोद जिले के धनोरा गांव में आंचल महिला संकुल संगठन की महिलाएं राष्ट्रीय आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर होली के लिए प्राकृतिक रंग तैयार कर रही है. यहां के गुलाल की डिमांड रायपुर तक है. रायपुर के व्यापारियों से 200 किलो हर्बल गुलाल की डिमांड मिली है, जिसे पूरा करने में महिलाएं लगी हुई है.
हर्बल गुलाल कैसे बनता है: नीम के पत्ते, हरी पत्तेदार सब्जियों से हरा रंग, चुकंदर से लाल और गुलाबी, गेंदा, पलाश और कनेर के फूल से नारंगी और पीला हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है. इस प्राकृतिक रंग की कीमत भी काफी कम है. 100 से 120 रु. प्रति किलो में स्किन फ्रेंडली हर्बल गुलाल बेचा जा रहा है. होली पर हर्बल गुलाल के प्रयोग से त्वचा की ना सिर्फ रक्षा होती है बल्कि प्राकृतिक चीजों का प्रयोग स्किन को निखारने का भी काम करता है.
100 से 200 रुपये किलो हर्बल गुलाल: सहायक विकास विस्तार अधिकारी लक्ष्मी ठाकुर ने बताया कि समूहों की ग्रामीण महिलाओं के बनाए हर्बल गुलाल की कीमत 100 से 120 रुपये प्रति किलो रखा गया है. टीम मेंबर यारूनी साहू ने बताया कि महिलाओं का संगठन समय समय पर इस तरह का काम करता है. गुलाल में काफी अच्छा अनुभव रहा है. बीते दिनों जनपद में स्टॉल लगाया था.
इस त्योहारी सीजन 500 किलो से ज्यादा गुलाल बेचने का लक्ष्य रखा गया है. अब तक जिले में कुल 21 क्विंटल हर्बल गुलाल का निर्माण कर लिया गया हैं.समूह की महिलाएं दूसरे लोगों को भी हर्बल गुलाल के उपयोग करने के लिए प्रेरित कर रही है. इसके साथ ही निर्मित किए जा रहे हर्बल गुलाल के बेहतर पैकेजिंग और व्यापार पर भी ध्यान दिया जा रहा है. इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही है.