नई दिल्ली:– गरुड़ पुराण के अनुसार पाप या बुरे कर्म करने वाले लोगों को मरने के बाद भी इसकी सजा भुगतनी पड़ती है। बुरे कर्म करने वाले मनुष्यों को नरक में भेजा जाता है, जहां पर उसे अपने कर्मों का हिसाब देना पड़ता है। आपने भी कभी न कभी यह बात जरूर सुनी होगी लेकिन दूसरी तरफ आपके दिमाग में भी यह सवाल आता होगा कि जब मरने के बाद शरीर से आत्मा निकल जाती है, तो ऐसे में नरक में आत्मा को यातना कैसे दी जाती होगी? क्योंकि आत्मा को तो शरीर की तरह पीड़ा नहीं होती। फिर मनुष्य नरक में अपने कर्मों की सजा कैसे पाता है? आइए, इस सवाल का जवाब जानते हैं गरुड़ पुराण में।
गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु से जूझ रहा व्यक्ति यमराज को देख पाने में सक्षम होता है। मृत्यु के समय उस व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता कम होने लगती है लेकिन उसे स्पष्ट रूप से यमराज दिखाई देने लगते हैं। जीवन और मृत्यु से जूझ रहा जीव कुछ बोलना चाहता है लेकिन उसके गले से आवाज नहीं निकलती। उसे आसपास खड़े लोगों की आवाजें सुनाई देनी बंद हो जाती है। उसे अपने जीवन की धुंधली यादें नजर आने लग जाती हैं, इसके बाद यमराज उस जीव के भीतर से आत्मा खींच लेते हैं और उसे यमलोक ले जाते हैं।
गरुड़ पुराण के अनुसार मनुष्य के जीवन का लेखा-जोखा पहले से तैयार होता है। जब आत्मा को लेकर यमराज यमलोक पहुंचते हैं, तो उस व्यक्ति का लेखा-जोखा यमराज के सामने पेश किया जाता है। इसके अनुसार ही यह निर्णय लिया जाता है कि व्यक्ति को स्वर्ग मिलेगा या फिर नरक। इसके बाद आत्मा की एक बार फिर से यात्रा शुरू हो जाती है। गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु को प्राप्त हो चुके व्यक्ति को मरने के बाद भी यात्रा करनी पड़ती है।
सूक्ष्म शरीर मिलने के बाद व्यक्ति को यमलोक जाने के लिए 99 हजार योजन की दूरी तय करनी पड़ती है। मनुष्यों की भाषा में 99 हजार योजन दूरी का अर्थ है 11 लाख 99 हजार और 988 किलोमीटर। पृथ्वी से यमलोक जाने वाला यह रास्ता बहुत ही मुश्किलों से भरा होता है। यहां यमलोक के 16 नगर होते हैं। आत्मा को सूक्ष्म शरीर लेकर हर यमलोक नगर से होकर गुजरना पड़ता है। इस सूक्ष्म शरीर के साथ व्यक्ति को किसी जीवित मनुष्य जितना ही कष्ट होता है।
मरने के 24 घंटे बाद किसी जीव की आत्मा फिर से पृथ्वी पर लौटती है। इस बार उस आत्मा को खुद ही यमलोक का सफर तय करना पड़ता है। हिन्दू धर्म के अनुसार जब कोई व्यक्ति मर जाता है, तो उसकी आत्मा की शांति के लिए और मुक्ति दिलाने के लिए 13 दिनों तक कर्मकांड किए जाते हैं। इन पूजा-हवन और 13वीं करने के बाद व्यक्ति का सूक्ष्म शरीर तैयार हो जाता है। यह सूक्ष्म शरीर किसी ऐसे शरीर की तरह ही होता है, जो व्यक्ति को पृथ्वी पर जीवन के समय मिला था। इसके बाद 13वें दिन सूक्ष्म शरीर के साथ आत्मा की यमलोक की यात्रा शुरू हो जाती है। इस सूक्ष्म शरीर के साथ आत्मा पैदल चलकर यमलोक पहुंचती है।
मनुष्य ने अपने जीवन में अगर बुरे काम किए होते हैं, तो उसे नरक की आग से गुजरना होता है। नरक में पहुंचकर उसे उसके कर्मों अनुसार कई यातनाओं से गुजरना पड़ता है। जैसे, अगर किसी मनुष्य ने अपने जीवन में किसी को धोखा दिया होता है, तो उसे लोहे की छड़ों से पीटा जाता है। वहीं, अपनी सुंदरता या शरीर पर अभिमान करने वाले मनुष्य को नरक की आग में जलाया जाता है। यह जीव का सूक्ष्म शरीर ही होता है, जिसे सजा दी जाती है। इस सूक्ष्म शरीर को भी दर्द होता है। यह सूक्ष्म शरीर अस्थायी तौर पर मिलता है। सजा पूरी होने के बाद जीव को कर्मों के अनुसार अगला जन्म लेने के लिए भेज दिया जाता है। वहीं, अगर किसी मनुष्य के कर्म अच्छे हैं, तो उसे स्वर्ग में भेजकर हर सुख-सुविधाएं दी जाती हैं।
