ED Action on Vivo: चीनी मोबाइल कंपनी वीवो द्वारा टैक्स चोरी मामले में ईडी ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी के भारत में स्थित 119 बैंक खाते सील कर दिये हैं। ED ने कंपनी के 48 से अधिक ठिकानों पर छापे मारे और जरुरी कागजात इकट्ठा करने के बाद ये कार्रवाई की।
ED के मुताबिक कंपनी ने टैक्स चोरी कर चीन समेत अन्य देशों में 62,476 करोड़ रुपये भेजे हैं। वीवो पर आरोप है कि कंपनी भारत में नुकसान दिखाकर विदेशों में टैक्स चोरी करके पैसा भेज रही थी। वीवो के जिन 119 बैंक अकाउंट्स को ब्लॉक किया गया है, उसमें फिलहाल 465 करोड़ रुपये का ग्रॉस बैलेंस है। जिसमें एफडी सहित वीवो इंडिया के 66 करोड़ रुपये, 2 किलो गोल्ड बार और लगभग 73 लाख रुपये कैश अमाउंट शामिल हैं।
VIVO ने हाईकोर्ट में की अपीलED की इस कार्रवाई से BBK Electronics की मालिकाना हक वाली चीनी कंपनी Vivo में हड़कंप मच गया है। कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कंपनी के बैंक खातों को खोलने का अनुरोध किया है। कंपनी का कहना है कि खाते सील होने की वजह से वो अपने कर्मचारियों को सैलरी नहीं दे पा रही है। कंपनी ने हाईकोर्ट में कहा कि कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए उन्हें इन खातों को ऑपरेट करना जरुरी है। इसलिए हाईकोर्ट ईडी को इस तरह का आदेश जारी करे। मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को आदेश दिया कि वे बुधवार तक इस मामले में कोई फैसला लें।
मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी, और इसी दिन ईडी भी अपना जवाब पेश करेगी।ED की ओर से जारी बयान के मुताबिक Vivo India अपने कुल सेल 1,25185 करोड़ रुपये का का लगभग 50 प्रतिशत यानी 62,476 करोड़ रुपये चीन भेज चुकी है।कंपनी ने यहां नुकसान दिखाया है, ताकि टैक्स चोरी की जा सके और करोड़ों की राशि विदेशों में भेज दी। प्रवर्तन निदेशालय फरवरी 2022 से वीवो के वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।कॉर्पोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री ने मई में भी Vivo और ZTE के कई भारतीय यूनिट्स की जांच की थी। केन्द्रीय एजेंसी को वीवो और ZTE द्वारा की जा रही वित्तीय गड़बड़ियों का पता चला था। उस समय कॉर्पोरेट मंत्रालय ने कंपनी के डायरेक्टर्स, शेयरहोल्डर्स, बेनिफिशिरी और ऑनर्स आदि की डिटेल मांगी थी।
इससे पहले भी केन्द्र सरकार की जांच एजेंसी ED ने चीनी कंपनी Xiaomi से वित्तीय गड़बड़ियों की वजह से 5551 करोड़ रुपये जब्त किए थे। Xiaomi के अलावा केन्द्र सरकार ने 2020 से लेकर अब तक 500 से ज्यादा चीनी कंपनियों के अकाउंट्स की जांच की है