मंडला:- बालाघाट और मंडला की सीमा पर हॉक फोर्स और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई. इस मुठभेड़ में दो महिला नक्सलियों के मारे की खबर है. बालाघाट के पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने इस बात की पुष्टि की है. उन्होंने बताया “यह मुठभेड़ सुबह हुई है और इसमें नक्सली और सुरक्षा बल के बीच में गोलीबारी हुई. जिसमें दो महिला नक्सलियों की जान चली गई है.” अभी भी गोलीबारी जारी है.
मंडला में दो महिला नक्सली ढेर
बताया जा रहा है कि मंडला के बिछिया थाना अंतर्गत मुंडिदादर, गन्हेरिदादर के जंगल में यह मुठभेड़ हुई. मुठभेड़ में हॉकफोर्स ने दो महिला नक्सलियों को मार गिराया है. कहा जा रहा है कि अभी यह मुठभेड़ जारी है. वहीं पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने बताया कि “इस ऑपरेशन में नक्सली गतिविधियों को नियंत्रित करने वाली हॉक फोर्स और नक्सलियों के बीच में मुठभेड़ जारी है.
एमपी डीजीपी ने दी जानकारी
वहीं इस एनकाउंटर को लेकर मध्य प्रदेश डीजापी कैलाश मकवाना ने सोशल मीडिया X पर ट्वीट कर जानकारी दी है. उन्होंने लिखा “जिला मंडला के थाना बिछिया अंतर्गत आज सुबह पुलिस – नक्सली मुठभेड़ में दो महिला नक्सली धराशायी की गई. उनके कब्जे से एक एसएलआर राइफल व एक राइफल, वायरलेस सेट और अन्य दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद की गई हैं. सर्चिंग जारी है.”
बता दें यह स्थान मंडला और बालाघाट जिले की सीमा पर है. राज्य और केंद्र सरकार नक्सली गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त करने के लिए अभियान चला रही है. इसी वजह से नक्सली क्षेत्र में सुरक्षा बलों की गतिविधियां बढ़ गई हैं. बताया जा रहा है कि इस एनकाउंटर में पुलिस को बड़ी तादाद में नक्सलियों के गोला बारूद भी मिले हैं. मध्य प्रदेश के गृह विभाग का दावा है कि बालाघाट मंडला और डिंडोरी के जंगलों में नक्सली गतिविधियां जारी हैं. इसीलिए इन जिलों के लिए केंद्र सरकार ने नक्सली गतिविधियां रोकने के लिए अलग से बजट भी जारी किया है. वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी कह चुके हैं कि जल्द ही नक्सलयों का पूरी तरह सफाया होगा.
9 मार्च को हुए एनकाउंटर पर उठे थे सवाल
गौरतलब है कि 9 मार्च को भी मंडला का कान्हा नेशनल पार्क के चिमटा वन परिक्षेत्र में मुठभेड़ हुई थी. जहां खबर आई थी कि हॉक फोर्स ने इस मुठभेड़ में एक नक्सली मार गिराया था. दो नक्सलियों के समर्थकों के गिरफ्तार किया था. हालांकि बाद में इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा था.
कांग्रेस ने विधानसभा में इस नक्सली एनकाउंटर को फर्जी बताया था. कांग्रेस का आरोप था कि नक्सली बताकर एक मानसिक रूप से कमजोर आदिवासी को मार डाला है. कांग्रेस ने पीड़ित परिवार को 2 करोड़ मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग की थी. जबकि सरकार ने जांच की बात कही थी.