यह विदा है, अलविदा नहीं, कभी विचार की बिजली कौंधी तो फिर रूबरू हो सकता हूं…
जाने-माने फिल्म समीक्षक जय प्रकाश चौकसे का निधन हो गया है. इंदौर में उन्होंने आखिरी सांस ली. पिछले हफ्ते उन्होंने अपने लोकप्रिय कॉलम ‘परदे के पीछे’ की अंतिम किस्त लिखी थी. बीते कुछ वक्त से वह बहुत ज्यादा बीमार चल रहे थे.
83 वर्षीय चौकसे के कई आलेख व फिल्म समीक्षा देश की प्रमुख फिल्म पत्रिकाओं व अखबारों में प्रकाशित हुईं। कई पाठक उनके लेखन के मुरीद थे। चंद दिनों पहले ही उन्होंने एक अग्रणी अखबार में अपने कॉलम की अंतिम किस्त लिखी थी।
चौकसे के फिल्म जगत की कई हस्तियों से नजदीकी रिश्ते थे। कपूर परिवार और सलीम खान के परिवार के तो वह बहुत करीब थे। उनकी खास किस्म की फिल्म समीक्षा को बॉलीवुड में भी पसंद किया जाता था।
आखिरी लेख की हेडलाइन कुछ इस प्रकार थी- प्रिय पाठको… यह विदा है, अलविदा नहीं, कभी विचार की बिजली कौंधी तो फिर रूबरू हो सकता हूं, लेकिन संभावनाएं शून्य हैं’. जय प्रकाश चौकसे के जाने से उनके चाहने वाले काफी दुखी हैं. सोशल मीडिया पर जय प्रकाश चौकसे को श्रद्धांजलि दी जा रही है.
जय प्रकाश चौकसे का जन्म 1 सितंबर 1939 को मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में हुआ था. बुरहानपुर से उन्होंने मेट्रिक की पढ़ाई की थी. फिल्म पत्रकारिता में जय प्रकाश चौकसे बड़ा नाम थे. उनके द्वारा लिखे गए लेख काफी पढ़े जाते थे. फिल्म जगत से जुड़े मसलों पर उनके विचार हो या उनके द्वारा की गई फिल्म समीक्षा का काफी महत्व माना जाता था.