
छ: वर्षों से वेतन में नहीं हुई वृद्धि
ओड़गी- 34 वर्षों से नियमितिकरण की आस देख रहे सूरजपुर जिले के प्राथमिक लघूवनोपज सहकारी समिति ओड़गी समेत सभी विकासखंडों के समिति के प्रबंधक 11 अप्रैल से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर हैं।
प्रबंधकों के हड़ताल पर जाने से तेंदूपत्ता, महुआ फ़ूल ख़रीदीं, लघूवनोपज संग्रहण, ग्रामीणों के बीमा योजना संबंधी जनता से जुड़े अनेक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कांग्रेस की सरकार द्वारा जन घोषणा पत्र में प्रबंधकों को तृतीय वर्ग कर्मचारी का दर्जा देकर नियमितिकरण करने का वादा किया था। किंतु 3 वर्ष बीतने के बाद भी इस पर कोई निर्णय नही किया गया। सिर्फ आश्वासन ही दिया जा रहा है। जिससे प्रबंधको में सरकार के ढीले रवैया के चलते काफी रोष देखा जा रहा है।छत्तीसगढ़ राज्य प्रबंधक संघ के आव्हान पर सभी प्रबंधको ने अनिश्चित कालीन हड़ताल का निर्णय लिया है।
प्रबंधक ऐसे ही रहे हड़ताल पर तो ग्रामीण हो सकते विभिन्न योजनाओं से वंचित
प्रबंधकों का कहना है हम अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे और सरकार हमारी मांगे पूरी नहीं करती है तो ग्रामीण विभिन्न योजनाओं से वंचित हो जाएंगे। क्योंकि सरकार का ही नियम है बीमा योजनाएं, छात्रवृत्ति योजनाएं, संघ के चुनाव लड़ने या किसी भी तेंदूपत्ता योजना का लाभ लेने संग्राहकों को कम से कम 500 गड्डी तेंदूपत्ता संग्रहण करना अनिवार्य है। *प्रबंधकों ने राज्य सरकार को दिलाये थे 13 नेशनल अवार्ड*प्रबंधको के ही कड़ी महेनत का नतीजा था जिसके कारण वर्ष 2020-21 में न्यून्तम समर्थन मूल्य योजना अंतर्गत वनोपजों के संग्रहण एवं विपडन हेतु राज्य शासन को 13 राष्ट्रीय अवार्ड मिले थे।
जिससे सूरजपुर जिले समेत पूरे राज्य में खुशी की लहर है। इस वर्ष भी विगत वर्षों से ज्यादा वनोपज संग्रहण का लक्ष्य राज्य शासन द्वारा रखा गया है। किंतु प्रबंधको का विगत 34 वर्षों से हो रहे शोषण के चलते इस वर्ष लघु वनोपज के संग्रहण में कमी आ सकती है।छत्तीसगढ़ में हरा सोना कहा जाने वाला तेंदूपत्ता तोड़ाई में भी कुछ ही दिन रह गए हैं , सरकार यदि प्रबंधकों की मांगे नहीं मानी तो इससे गरीब वनवासियों को भारी नुकसान होगा।*6 वर्षो से वेतन में नही हुई वृद्धि*प्रबंधको के साथ राज्य सरकार के दोहरे मापदंड और शोषण की हद इतनी बढ़ गई है कि विगत 6 वर्षों से प्रबंधकों का एक भी रुपये वेतन में वृद्धि नही की गई है। आज देश मे महंगाई जहां चरम सीमा पार कर चुकी है, वही प्रबंधको के साथ इस तरह दुर्व्यवहार एवं निंदनीय है।
हाथ में गंगाजल का कसम खाकर बनाया था जनघोषणा पत्र
कांग्रेस सरकार ने गंगाजल की कसम खाकर जनघोषणा पत्र बनाया था जिसमे वनोपज प्रबंधकों को तृतीय वर्ग कर्मचारियों का दर्जा देकर नियमितीकरण की बात की गई थी। किंतु 3 वर्षो से अधिक होने के बाद भी आज तक उसपर कोई निर्णय नही हो सका।