नई दिल्ली:– पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री यादव ने बताया कि केंद्र ने तेलंगाना भूपेंद्र यादव सरकार को नोटिस भेजकर हैदराबाद विश्वविद्यालय (पुओएच) परिसर के पास कांया गाचीयोवली वन क्षेत्र में 400 एकड़ भूमि पर पेड़ों की कथित कटाई पर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।
राज्यसभा में भूपेंद्र यादव ने कहा कि हैदराबाद में एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई है। मैं यह समझ नहीं पा रहा हूं कि राज्य सरकार को उन पेड़ों और हरित क्षेत्र से आखिर कैसी दुश्मनी है कि उन्हें रात के अंधेरे में अभियान चलाना पड़ रहा है। राज्य सरकार ने 400 से अधिक पेड़ काटे हैं। मोर जैसे पक्षी की प्रजातियों को भगाया जा रहा है और आप इसे वीडियो और तस्सीरों में देख सकते हैं। इस संबंध में हमने मुख्य सचिव को नोटिस भेजा है और तथ्यात्मक रिपोर्ट भी मांगी है। हम निक्षित रूप से इस मामले में कार्रवाई करेंगे।
भूपेंद्र यादव बीआरएस सदस्य रविचंद्र वड्डीराजू के पूरक प्रश्नों का जवाच दे रहे थे जिन्होंने कथित तौर पर नष्ट किए जा रहे हरित आवरण को सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी। इस बीच उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को निर्देश दिया कि हैदराबाद विश्वविद्यालय के बगल वाले भूखंड पर तेलंगाना सरकार को पेड़ों के संरक्षण के अलावा किसी भी प्रकार की कोई गतिविधि नहीं करनी साहिए।
पेड़ों की कटाई है बहुत गंभीर मामला
राज्य में पेड़ों की कटाई को ‘बहुत गंभीर मामला बताते हुए न्यायमूर्ति बौर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि तेलंगाना उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार द्वारा उसके समक्ष पेश की गई अंतरिम रिपोर्ट ‘चिंताजनक तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट में अदालत को बताया गया कि बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए है। पीठ ने तेलंगाना के मुख्य सचिव से पूछा कि राज्य द्वारा पेड़ों को हटाने समेत विकासात्मक गतिविधियां शुरू करने की तत्काल इतनी क्या मजबूरी है।
मुख्य सचिव को यह भी बताने का निर्देश दिया गया कि क्या राज्य ने ऐसी गतिविधियों के लिए पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्रमाणपत्र प्राप्त किया है. पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 16 अप्रैल निधर्धारित की। इससे पहले दिन में न्यायालय ने हैदराबाद विश्वविद्यालय से सटी 400 एकड़ जमीन पर पेड़ों की कटाई मामले का संज्ञान लेते हुए तेलंगाना उच्ब न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को कांया गाचीथोवाली वन क्षेत्र का तत्काल दौरा करने का निर्देश दिया।
पेड़ों की कटाई के विरोध में भूख हड़ताल
यूओषय की सीमा से लगी 400 एकड़ भूमि को विकसित करने और वहां आईटी पार्क स्थापित करने की तेलंगाना सरकार की योजना के खिलाफ विश्वविद्यालय के छात्र संघ ने बृहस्पतिवार को कामिक भूख हड़ताल शुरू की ओएचएसयू के उपाध्यक्ष आकाश कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर क्रमिक भूख हड़ताल शुरू की गई जिसमें परिसर में ‘पेड़ों को काटे जाने से रोकने, भारी मशीनों को हटाने और परिसर से पुलिसकर्मियों को वापस भेजने की मांग की गई। कक्षाओं का बहिष्कान भी जारी है। हालांकि यह स्वैक्षिक है। यूओएएसयू और इससे संबद्ध अन्य संपों तथा दलों ने अपनी मांगों के समर्थन में। अप्रैल से अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन और कक्षाओं के वहिष्कार करने का ऐलान किया था।
ABVP कार्यकर्ता हिरासत में
उधर, विश्वविद्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे एबीवीपी के कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस ने स ने वास्पतिवार को हिरासत में ले लिया। एबीवीपी के एक सदस्य ने सरकार से 400 एकड़ जमीन की नीलामी का फैसला वापस लेने की मांग की। एक घर साई निशांत ने बताया कि एवीवीपी से संबद्ध छात्रों ने विश्वविद्यालय में धरना शुरू किया है. छात्र संगठनों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण संबंधी विताओं का हवाला देते हुए उक्त भूमि पर प्रस्तावित शिकवस परियोजनाओं कर विरोध किया है।
धर्मेंद्र प्रधान से हस्तक्षेप की मांग
यूएमएसयू के प्रतिनिधियों ने दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री गजेंद्र प्रधान से मुलाकात की और यूओएच में कथित भूमि अतिक्रमण को दूर करने के लिए मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
इको पार्क स्थापित करेगी BRS
वहीं बीआरएस के कार्यकारी आवश के टी. रामा राव ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी पार्टी सत्ता में आने पर 400 एकड़ भूमि पर इको पार्क स्थापित करेंगी और जैव विविधता को संरक्षित करेगी, छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन 31 मार्च को उस समय तेज हो गया जब सरकार ने कहा कि उक्त भूमि उसकी है। विश्वविद्यालय की नहीं। तेलंगाना उब्ब न्यायालय ने राज्य सरकार को हैदराबाद विश्वविद्यालय से सटी 400 एकड़ भूमि पर सभी कार्य एक दिन के लिए स्थगित करने का निर्देश दिया।
