नई दिल्ली:– आज भारत ग्रहों पर अध्यन करने की रेस में सबसे आगे निकल गया है। अब से कुछ समय पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अपने 100वें उपग्रह का प्रक्षेपण किया है। यह उपलब्धि इसरो के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है। जी हां, इसरो ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से आज रॉकेट लॉचिंग का शतक लगा दिया है।
आज ISRO ने GSLV-F15 रॉकेट के जरिए नेविगेशन सैटेलाइट को लॉन्च किया। इसमें नाविक के तहत दूसरी पीढ़ी के पांच उपग्रह शामिल हैं। जानकारी दें कि, इससे पहले 29 मई 2023 को एनवीएस-01 को जीएसएलवी-एफ12 के जरिये लॉन्च किया था।
आज चेन्नई से करीब 110 किलोमीटर दूर स्थित श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से इस 100वें उपग्रह GSLV रॉकेट के जरिए नेविगेशन उपग्रह से प्रक्षेपित किया गया है। स्वदेशी क्रायोजेनिक चरण के साथ भू-समकालीन उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV) अपनी 17वीं उड़ान में नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-02 को लेकर यहां दूसरे लॉन्च पैड से आज यानी 29 जनवरी को अब से कुछ देर पहले यानी सुबह छह बजकर 23 मिनट पर प्रक्षेपित किया गया।
इस बाबत केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने ‘X’ पर लिखा कि, “100वां प्रक्षेपण: श्रीहरिकोटा से 100वें प्रक्षेपण की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने के लिए ISRO को बधाई। इस रिकॉर्ड उपलब्धि के ऐतिहासिक क्षण में अंतरिक्ष विभाग से जुड़ना सौभाग्य की बात है। टीम ISRO, आपने एक बार फिर GSLV-F15 / NVS-02 मिशन के सफल प्रक्षेपण से भारत को गौरवान्वित किया है। विक्रम साराभाई, सतीश धवन और कुछ अन्य लोगों द्वारा एक छोटी सी शुरुआत से, यह एक अद्भुत यात्रा रही है और पीएम मोदी द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को “अनलॉक” करने और यह विश्वास जगाने के बाद कि “आकाश की कोई सीमा नहीं है” यह एक बड़ी छलांग है।”
जानकारी दें कि, यह नेविगेशन उपग्रह ‘नेविगेशन विद इंडियन कांस्टेलेशन’ (नाविक) श्रृंखला का दूसरा उपग्रह है, जिसका उद्देश्य भारतीय उपमहाद्वीप के साथ-साथ भारतीय भूभाग से लगभग 1,500 किलोमीटर आगे के क्षेत्रों में उपयोगकर्ताओं को सटीक स्थिति, गति और समय की जानकारी प्रदान करना है।
वहीं यूआर सैटेलाइट सेंटर द्वारा खास तौर पर डिजाइन और विकसित इस NVS-02 उपग्रह का वजन लगभग 2250 किलोग्राम है। इसमें एल1, एल5 और एस बैंड में नेविगेशन पेलोड के साथ-साथ सी-बैंड में रेंजिंग पेलोड भी लगाया गया है, जैसा कि इसकी पहली पीढ़ी की सैटेलाइट एनवीएस-01 में था।
वहीं NavIC (नेविगेशन विद इंडियन कंस्टीलेशन) भारत का स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम है। इसका उद्देश्य भारत और भारतीय जमीन से 1,500 किमी तक फैले क्षेत्र में उपयोगकर्ताओं को सटीक पोजीशन, वेलोसिटी और टाइमिंग सेवाएं भी सटीकता से प्रदान करना है।
