हैदराबाद:- गचिबोवली में मौजूद एक स्किनकेयर और हेयरकेयर कंपनी के साथ एक बड़ा साइबर क्राइम हुआ है, जिसके कारण उन्हें 12.78 करोड़ रुपये का तगड़ा नुकसान हुआ है. दरअसल, हैदराबाद की इस कंपनी को कथित तौर पर गूगल पर अनऑथोराइज़्ड विज्ञापनों के कारण 12.78 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. इस बड़े साइबर फ्रॉड के बाद हैदराबाद की इस स्किनकेयर और हेयरकेयर कंपनी ने तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (TGCSB) को औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराई, जिसने बुधवार को शिकायत दर्ज की है.
अधिकारियों के अनुसार, कंपनी ने लगभग दस महीने पहले अपने डिजिटल मार्केटिंग एक्टिविटीज़ का काम दिल्ली की एक एसेंजी को दिया था. इसके लिए हैदराबाद की कंपनी ने दिल्ली की एजेंसी के साथ एक समझौता किया था. उसके मुताबिक, एजेंसी को ऐसी जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसके लिए रोज 10,000 रुपये से लेकर 15,000 रुपये तक की लागत लगती है.
18 मई को चला पता
हालांकि, 18 मई को एजेंसी के एक अधिकारी ने कंपनी के मैनेजमेंट को कॉल किया और हैरान करने वाली एक बात बताई. एजेंसी ने कंपनी को बताया कि 17 और 18 मई को विज्ञापन पर 12.78 करोड़ रुपये का बड़ा खर्च किया गया है. यह कंपनी के द्वारा तय किए गए बजट से काफी ज्यादा था. उसके बाद जब एजेंसी और कंपनी ने मिलकर इस मामले की जांच की तो पता चला कि ऐसा कोई विज्ञापन अभियान ना ही स्वीकार किया गया था और ना ही एजेंसी ने ऐसा कोई विज्ञापन अभियान चलाया है. इससे एजेंसी के गूगल एड अकाउंट के हैक किए जाने या अनधिकृत एक्सेस किए जाने का शक पैदा हुआ.
उसके बाद कंपनी ने तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (TGCSB) से कॉन्टैक्ट किया, जिसमें अचानक चलाए गए विज्ञापनों और बिना हिसाब-किताब वाले विज्ञापन अभियानों की गहरी जांच करने की मांग की गई है. इस साइबर फ्रॉड के जरिए कंपनी को काफी बड़े नुकसान का सामना करना पड़ा है. साइबर क्राइम के ऑफिसर्स ने इस शिकायत को दर्ज करके इसके बारे में जांच शुरू कर दी है और इस अनधिकृत एक्टविटीज़ का सोर्स पता लगाने के लिए छानबीन करना शुरू कर दिया है.
गूगल के पास अनऑथोराइज़्ड एक्टिविटीज़ को पता लगाने के लिए एक ऑटोमैटिक सिस्टम है, जिसके कारण कभी-कभी विज्ञापनदाता के अकाउंट को सस्पेंड भी किए जाते हैं. हालांकि, क्रेडेंशियल चोरी, फ़िशिंग या आंतरिक खतरों गूगल के इस ऑटोमैटिक सिस्टम को चकमा दे सकते हैं. यह साइबर फ्रॉड हैदराबाद की स्किनकेयर और हेयरकेयर कंपनी या दिल्ली की एजेंसी के ऑनलाइन सिस्टम को हैक या हाइजैक करके किया जा सकता है. हालांकि, सच्चाई का पता तो साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो की जांच खत्म होने के बाद ही चलेगा.
