रायपुर:- हर घर नल से जल पहुंचाने का वादा लगातार सरकार कर रही है. इसके तहत अमृत मिशन समेत कई योजनाएं चल रही है. छत्तीसगढ़ में भी यह योजना संचालित है. इसके बावजूद राजधानी में ही सिर्फ जून 2025 में निगम के 30-40 टैंकर रोजाना कई ट्रिप लगा रहे थे. ये आंकड़े बता रहे हैं कि अभी भी कई घरों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है. हालांकि 2028 तक पूरा टारगेट हासिल करने का दावा सरकार कर रही है.
रायपुर का हाल जानिए:
राजधानी में तो अमृत मिशन योजना के अलावा स्मार्ट सिटी योजना के तहत भी हर घर जल पहुंचाने का काम किया जा रहा है. इसके लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे. बावजूद इसके आज भी राजधानी के कई घरों में या तो नल ही नहीं है या उनमें पानी नहीं है. रायपुर में 630 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर पानी देने की दो बड़ी योजनाएं चलाई गई थी. एक अमृत मिशन और दूसरी स्मार्ट सिटी की 24×7 पेयजल योजना।
टैंकर रोजाना 350 से लेकर 400 ट्रिप लगा रहे:
अकेले अमृत मिशन योजना के तहत लगभग 500 करोड़ और स्मार्ट सिटी पेय जल योजना के तहत लगभग 130 रुपए खर्च किए जा चुके हैं. बावजूद इसके नगर निगम हर साल टैंकरों पर लगभग एक करोड़ रुपए तक खर्च कर रहा है. जून 2025 में शहर में लगभग 30 से 40 टैंकर रोजाना 350 से लेकर 400 ट्रिप लगा रहे थे.
साल दर साल बढ़ता गया टैंकरों पर खर्च
2022-23 में टैंकर ऊपर लगभग 57 लाख रुपए खर्च किए गए थे.
2023-24 में लगभग 75 लाख रुपए खर्च किए गए.
वर्तमान साल 2024 25 की बात की जाए तो लगभग एक करोड़ रुपए टैंकरों पर खर्च किए जाने का अनुमान है.
जुलाई में भी कुछ वार्डों में टैंकरों से ही पहुंचेगा पानी: निगम अधिकारियों की माने तो जुलाई में राजधानी के कुछ वार्डों में 30 से 35 टैंकरों से आपूर्ति जारी रहेगी, यानी कि खर्च और भी बढ़ सकता है.निगम मुख्यालय ने टैंकर सप्लाई के खर्च की सभी जोन से रिपोर्ट भी मांगी है.
इन वार्डों में टैंकर से पानी सप्लाई ज्यादा:
ठक्कर बापा वार्ड, वीरांगना अवंती बाई वार्ड, रमन मंदिर चंगोराभाटा, पुरानी बस्ती, महामाया मंदिर तात्यापारा, चूड़ामणि वार्ड, विद्याचरण शुक्ल वार्ड, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद वार्ड,रविंद्र नाथ टैगोर वार्ड
टैंकर से कहां और कितना पानी सप्लाई हुआ इस पर नजर रखने और पारदर्शिता के लिए टैंकरों पर जीपीएस लगाया जाना था। यह भी अबतक कागजों तक ही सीमित है.
मंत्री ने ली बैठक:
उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय निकाय मंत्री अरुण साव से बात की तो उनका कहना था कि महापौर और निगम अधिकारियों के साथ बैठक की गई है. इसके क्रियान्वयन में किस तरह की दिक्कतें आ रही है, उस पर चर्चा की गई. इसके बाद उन समस्याओं को दूर करने के लिए काम किया जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांव में हर घर तक नल से जल पहुंचने का बीड़ा उठाया, लेकिन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इस योजना पर पालिदा लगाया गया. हमारी सरकार बनने के बाद आज हम उन कामों को आगे ले जा रहे हैं. 2028 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य भारत सरकार की ओर से दिया गया है. इसे हम पूरा करेंगे. साथ ही जल संरक्षण भी बड़ी चुनौती है. जिस तरीके से जल का स्तर लगातार नीचे जा रहा है, सब लोगों को मिलकर वाटर हार्वेस्टिंग के काम पर लगना होगा। यह सही है कि आज भी लोगों तक शुद्ध पेयजल नहीं पहुंच रहा है, लेकिन हमारी सरकार इस पर प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है- अरुण साव, डिप्टी सीएम
इन सवालों का जवाब मिलना है बाकी:
इस बीच घर-घर पानी पहुंचाने वाली योजना को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं. करोड़ों की योजना के बावजूद टैंकरों पर आज भी राजधानी क्यों निर्भर है? क्यों अभी तक 24×7 जल योजना धरातल पर नजर नहीं आ रही है? यहां जिम्मेदारी कब तक तय होगी?