मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर:- हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा ये कहावत छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में स्थित मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर में सही साबित हो रही है. यहां के जंगलों में महुआ के पेड़ों की भरमार है. मार्च से अप्रैल के बीच यहां के जंगल महुआ के फूलों के खिलने का समय और फलों के बिक्री और संग्रहण का समय होता है. यही वजह है कि इन ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के लोग महुआ के फूल और फलों को चुनने के लिए घूमते हैं. महुआ के फूलों और फलों का संग्रहण कर उसे बेचते हैं. सुबह 5 बजे से सुबह 11 बजे तक यह महुआ चुनते हैं और फिर घर को आते हैं.
गांव में रहता है सन्नाटा: महुआ के फल और फूल चुनने के लिए गांव में सन्नाटा रहता है. महुआ के इस सीजन में गांवों की गलियों में न कोई आवाजाही है,न ही किसी घर से चूल्हे की गंध आती है. बच्चे,बूढ़े और महिलाएं और युवक सब जंगलों में महुआ चुनने जाते हैं. ग्रामीणों के अनुसार,एक स्वस्थ महुआ पेड़ से लगभग एक से दो क्विंटल फूल इकट्ठा किया जा सकता है. यही वजह है कि इन पेड़ों की देखभाल किसी देवता की तरह की जाती है. कोरिया और एमसीबी क्षेत्र के आदिवासी महुआ को न केवल आर्थिक साधन बल्कि सांस्कृतिक प्रतीक मानते हैं.
महुआ हमारे जीवन का आधार है. हमारा साल भर का नमक, तेल,दवाई और कपड़ा सब इसी से चलता है. शादी-ब्याह और बच्चों की पढ़ाई तक इससे होती है. हम सुबह चार बजे उठकर जंगल चले जाते हैं. सारा परिवार महुआ चुनने का काम करता है- ध्रुव नारायण तिवारी, ग्रामीण
कई लोगों के जीवन को महुआ ने संवारा: सरकारी शिक्षक के पद से रिटायर होने वाले श्यामलाल बैगा कहते हैं कि उन्होंने अपने बचपन में महुआ बेचकर पढ़ाई की. आज 62 साल की उम्र में भी अपनी पत्नी के साथ जंगल जाता हूं और महुआ चुनता हूं. यह सिर्फ फूल नहीं,हमारे लिए जीवन की सुगंध है. महुआ खाने से शरीर में ऊर्जा आती है और फिर दिनभर काम करने पर भी थकान नहीं होती.
महुआ सिर्फ फूल नहीं यह मजदूर और किसानों के लिए साल भर की कमाई है. यह मनरेगा से भी बड़ा रोजगार है. अगर इसे ठीक से संजोया जाए तो एक परिवार बीस-बीस हजार रुपए तक की कमाई कर सकता है- समर बहादुर सिंह, पूर्व सरपंच
“महुआ स्वास्थ्य के लिए लाभदायक”: मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर के जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ.अविनाश खरे बताते हैं कि महुआ एक बहुत ही उपयोगी वनोपज है. इसके फूल और फल दोनों में औषधीय गुण होते हैं. यह हृदय रोग,डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक है. इसमें एंटीऑक्सिडेंट्स और तनाव दूर करने वाले तत्व भी पाए जाते हैं.
महुआ का सेवन सीमित मात्रा में ही लाभकारी होता है. अधिक सेवन से गैस,अपच और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं- अविनाश खरे, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर
कुल मिलाकर महुआ का संग्रहण और उसकी बिक्री महुआ के गुण के आधार पर होती है. इस फल में पाए जाने वाला इसे बरसों से मूल्यवान बनाए हुए है. इसी वजह से ग्रामीण इलाकों में लोग इसके संग्रहण में जुटे रहते हैं.