नई दिल्ली:– हस्तरेखा शास्त्र में हथेली की रेखाओं के साथ ही कुछ विशेष चिह्नों का भी जिक्र मिलता है। जिस तरह हथेली की रेखाओं को देखकर व्यक्ति के भूत-भविष्य का पता चलता है, उसी तरह हथेली पर बनने वाली चिह्न भी बहुत कुछ जानकारी देते हैं। हथेली में मछली, त्रिशूल, तलवार आदि कई तरह के निशान देखे जा सकते हैं। इनमें से कुछ निशान ऐसे होते हैं जिनको भगवान शिव की कृपा का प्रतीक माना जाता है। आज हम आपको इन्हीं चिह्नों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।
हथेली पर डमरू का निशान
डमरू भगवान शिव का वाद्ययंत्र है। माना जाता है कि जब शिवजी ने डमरू बजाया था तब सृष्टि में सुर-ताल की उत्पत्ति हुई थी। अगर हथेली में रेखाओं से डमरू का निशान बनता है तो इसे शिव कृपा का प्रतीक माना जाता है। इसका अर्थ होता है कि शिव भगवान आपको कला और रचनात्मकता का आशीर्वाद देंगे। माना जाता है कि जिन भी लोगों की हथेली पर डमरू का निशान बनता है, उनके जीवन में शिव भगवान परेशानियां नहीं आने देते। इन्हें होने वाली दुर्घटना का पूर्वाभास भी हो सकता है।
हथेली में त्रिशूल का निशान
त्रिशूल भगवान शिव का शस्त्र है। इसका हथेली में होना आपको पराक्रमी बनाता है। जिन लोगों की हथेली पर यह निशान बनता है उन्हें भाग्य का भी सहयोग प्राप्त होता है। यह निशान अगर भाग्य और मस्तिष्क रेखा के द्वारा बनता है तो समझ जाइए जीवन में हर सुख-सुविधा भगवान शिव की कृपा से आपको मिलेगी। पारिवारिक जीवन में भी ऐसे लोगों को शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
हथेली पर अर्ध चंद्रमा
अगर किसी व्यक्ति की दोनों हथेलियों को मिलाकार अर्ध चंद्रमा बनता है तो इसे बेहद शुभ माना जाता है। यह निशान आपके ऊपर भगवान शिव का आशीर्वाद दर्शाता है। ऐसे लोगों को पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में उत्तम परिणाम मिलते हैं। इस चिह्न वाले व्यक्ति कभी भी जीवन में हार नहीं मानते। हालांकि, अर्ध चंद्रमा किसी अन्य रेखा से कटा हुआ नहीं होना चाहिए।
हथेली में ध्वज
अगर किसी व्यक्ति की हथेली पर ध्वज बनता है तो ये भी भगवान शिव की कृपा का प्रतीक होता है। इस चिह्न के बनने का अर्थ है कि शिव जी हर परेशानी में आपका साथ देंगे। मुश्किल परिस्थितियों में भी कोई न कोई आपका सही मार्गदर्शन कर सकता है। ध्वज का निशान त्रिकोण होता है, इस बात का ध्यान रखें।
