दुर्ग :- ट्विनसिटी दुर्ग भिलाई में गर्मी के दिनों में पानी की सबसे ज्यादा किल्लत होती है.कहने के लिए तो शहर के हर वार्ड में जल जीवन मिशन का पानी पहुंच रहा है.लेकिन हर साल गर्मी में जिस तरह की स्थिति बनती है वो किसी से छिपी नहीं है.लेकिन इस पानी की कमी के लिए शायद हम इंसान ही जिम्मेदार है.आज हम आपको जिले के ऐसे क्षेत्र की तस्वीर दिखाएंगे जहां कभी 16 एकड़ का साफ पानी से भरा लबालब तालाब हुआ करता था.ये इतना बड़ा तालाब था कि आसपास के 5 वार्डों के बाशिंदों को शायद ही कभी पानी की कमी होती.लेकिन ना तो वार्डवासियों ने और ना ही निगम ने इस तालाब पर नजरें इनायत की.लिहाजा आज ये तालाब गंदगी,कचरे और जलकुंभियों से भरा पड़ा है.
कहां है तालाब : दुर्ग जिले के शरद नगर कैंप -2 में 16 एकड़ का ऐतिहासिक तालाब है. जो कभी अपनी स्वच्छता और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध था. स्थानीय निवासियों की माने तो तालाब का पानी इतना साफ था कि उसमें गिरा सिक्का भी साफ दिखता था. लेकिन मौजूदा समय में ये तालाब अत्यधिक प्रदूषित हो चुका है. जिसमें जलकुंभी, कचरा और मृत जानवरों के अवशेष हैं.
बदतर स्थिति में है तालाब : आपको बता दें कि भिलाई के शरद नगर स्थित कैंप-2 का यह ऐतिहासिक तालाब की दुर्दशा के कारण आसपास के क्षेत्रों में दुर्गंध फैल रही है. जिससे स्थानीय निवासियों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है. ये तालाब पांच वार्डों से घिरा हुआ है, लेकिन अब तक किसी भी पार्षद ने इसे प्राथमिकता नहीं दी. हर साल गर्मियों में सफाई के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी की जाती हैं. लेकिन वास्तविक सुधार नहीं होता. स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब के विकास और सफाई के लिए अब तक लगभग 2 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं, लेकिन धरातल पर कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन दिखाई नहीं देता. विकास के दावे तो किए गए, लेकिन परिणाम शून्य रहे.
तालाब की पूरी सफाई के लिए एक विस्तृत योजना बननी चाहिए. जिसमें जलकुंभी, कचरा और अन्य अवशेषों को हटाया जाए. साथ ही सफाई के बाद तालाब के नियमित रखरखाव के लिए एक समिति का गठन किया जाए. जिसमें स्थानीय निवासियों की भागीदारी सुनिश्चित हो. स्थानीय समुदाय को तालाब की स्वच्छता और संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया जाए, ताकि वे स्वयं इसकी देखभाल में सक्रिय भूमिका निभा सकें – संगीता, स्थानीय निवासी
चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन कुर्सी मिलने के बाद तालाब और जनता दोनों को भुला दिया जाता है.मरने के बाद लोग तालाब में स्नान करने जाते हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह संभव नहीं है. हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द तालाब की सफाई और पुनर्स्थापना हो. अन्यथा आगामी चुनाव में बहिष्कार करने की तैयारी करेंगे- शारदा बघेल, स्थानीय निवासी
पैसों के बंदरबांट का लगा आरोप : स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह तालाब अब तक 17 बार बनाया जा चुका है. लेकिन हर बार केवल कागजी कार्यवाही और पैसों की बंदरबांट हुई.
जब भी तालाब के सौंदर्यीकरण और सफाई के लिए बजट आवंटित किया गया. कोई न कोई नेता या अधिकारी उस पैसे को गबन कर गया. जिससे तालाब का असली जीर्णोद्धार कभी नहीं हुआ- प्रमोद कुमार मेहता, स्थानीय नागरिक
इस तालाब के बारे में स्थानीय पार्षदों ने भी माना है कि तालाब के लिए सरकार ने बड़ी धनराशि उपलब्ध करवाई थी.लेकिन उसका सही इस्तेमाल नहीं हुआ.बचपन में इस तालाब का पानी काफी साफ था.लोग यहां पर दूर-दूर से नहाने आते थे.लेकिन अब तो इसमें सिर्फ गणेश पूजा के बाद प्रतिमाएं विसर्जित की जाती है.भैंस और जानवरों के नहाने का ठिकाना बन गया है. लेकिन सवाल ये उठता है कि ये राशि आखिर कहां गई.यदि तालाब में राशि नहीं लगाई गई तो काम करवाने वाले के ऊपर कार्रवाई क्यों नहीं हुई.वहीं भिलाई के शरद नगर स्थित कैंप-2 तालाब की दुर्दशा को लेकर बढ़ते जनआक्रोश के बीच महापौर नीरज पाल ने भी सफाई दी है
तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए पहले ही टेंडर जारी किया गया था.अधिकांश काम पूरा हो चुका है. हालांकि, अभी भी कुछ कार्य अधूरे हैं, जिन्हें जल्द ही पूरा किया जाएगा. इसके अलावा, बाकी बचे कार्यों को आगामी आम बजट में शामिल कर शीघ्र शुरू करने की योजना है- नीरज पाल, महापौर भिलाई नगर निगम
आपको बता दें कि इस तालाब से उठती दुर्गंध और गंदगी ने पूरे इलाके को अपने चपेट में ले रखा है.जिस तालाब में पहले लोग आचमन के लिए जाते थे,आज वही इससे दूरी बना रहे हैं.गंदगी और दुर्गंध इतनी है कि लोग यहां से निकलने में भी घबराते हैं.बावजूद इसके पांच वार्डों से घिरा ये तालाब अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए मुद्दा नहीं बना. हर साल गर्मियों में सफाई के नाम पर बस ढोंग होता है. लेकिन इस बार जनता ने जिस तरह की चेतावनी दी है,उसके बाद एक बार फिर इस तालाब के जीर्णोद्धार को लेकर उम्मीद जगी है.