कोरबा:– छत्तीसगढ़:
एनटीपीसी कोरबा की राखड़ समस्या को लेकर वर्षों से परेशान ग्रामीणों का आक्रोश आखिरकार फूट पड़ा। सोमवार को जब एनटीपीसी के अधिकारी प्रदर्शन कर रहे लोगों से बात करने मौके पर पहुंचे, तो नाराज ग्रामीणों ने अपना विरोध जताने के लिए उन पर राखड़ (फ्लाई ऐश) फेंक दी। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और घटना को लोगों ने “राखड़ की होली” का नाम दे दिया।
🔍 क्या है मामला?
कोरबा स्थित एनटीपीसी से निकलने वाली राखड़ के निपटान को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि राखड़ बांध से आसपास के गांवों में वायु और जल प्रदूषण फैल रहा है, जिससे फसलें बर्बाद, पीने का पानी दूषित और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।
📢 क्या कहते हैं ग्रामीण?
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि एनटीपीसी ने पहले भी कई बार राहत और पुनर्वास के वादे किए, लेकिन वे कभी जमीन पर नहीं उतरे। गांव वालों का आरोप है कि कंपनी ने उन्हें “सुनने का दिखावा” किया लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण है कि जब अधिकारी मौके पर पहुंचे, तो लोगों ने राखड़ फेंककर अपना गुस्सा जताया।
🏭 एनटीपीसी का पक्ष
एनटीपीसी अधिकारियों का कहना है कि कंपनी पर्यावरणीय मानकों का पालन कर रही है और स्थानीय विकास में योगदान दे रही है। कंपनी ने राखड़ के निपटान के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, और ग्रामीणों की शिकायतों पर विचार किया जा रहा है।
⚖️ विकास बनाम विनाश
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश का औद्योगिक विकास आम जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण की कीमत पर हो रहा है?
हर सिक्के के दो पहलू होते हैं — एक ओर बिजली उत्पादन से देश को ऊर्जा मिल रही है, वहीं दूसरी ओर राखड़ जैसे उत्पाद स्थानीय लोगों के लिए अभिशाप बनते जा रहे हैं।
