नई दिल्ली:– शास्त्रों में फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखती है। दरअसल, इस दिन महाशिवरात्रि का व्रत किया जाता है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन भगवान शिव की पूजा से व्यक्ति को विशेष फलों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा सुंदर, सुशील और अपने मनपसंद वर की प्राप्ति के लिए कन्याएं महाशिवरात्रि के दिन विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा अर्चना करती हैं। महाशिवरात्रि व्रत के दिन भारत देश में अलग-अलग जगहों पर स्थित बारह ज्योतिर्लिंगों की पूजा का भी विशेष विधान है। कहते हैं महाशिवरात्रि के दिन जो व्यक्ति बिल्व पत्तियों यानि बेल के पत्तों से शिव जी की पूजा करता है और रात के समय जागकर भगवान के मंत्रों का जप करता है उसे भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस साल महाशिवरात्रि का व्रत 26 फरवरी को रखा जाएगा।
महानिशीथ काल का महत्व
महाशिवरात्रि के दिन विशिष्ट सिद्धियों की प्राप्ति के लिए बहुत से लोग महानिशीथ काल में भगवान शिव की पूजा करते हैं। महानिशीथ काल 26 फरवरी को रात 11 बजकर 47 मिनट से मध्यरात्रि रात 12 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन से सृष्टि का प्रारंभ हुआ था। ईशान संहिता में ये भी बताया गया है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महानिशीथकाल में आदिदेव भगवान शिव करोड़ों सूर्यों के समान प्रभाव वाले लिंग रूप में प्रकट हुए थे- फाल्गुन कृष्ण चतुर्दश्याम आदिदेवो महानिशि। शिवलिंग तयोद्भूत: कोटि सूर्य समप्रभ:॥ इसीलिए आज के दिन महानिशीथ काल में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है।
महाशिवरात्रि के दिन रात्रि के प्रथम प्रहर में दूध से, दूसरे प्रहर में दही से, तीसरे प्रहर में घी से और चौथे प्रहर में मधु यानि शहद से शिवलिंग को स्नान कराना चाहिए। हर प्रहर में शिवलिंग को स्नान कराते समय अलग-अलग मंत्रों का भी जाप करना चाहिए। प्रथम प्रहर में ‘ह्रीं ईशानाय नमः।’, दूसरे प्रहर में ‘ह्रीं अघोराय नमः।’, तीसरे प्रहर में ‘ह्रीं वामदेवाय नमः। और चौथे प्रहर में ‘ह्रीं सद्योजाताय नमः।’ मंत्र का जप करते हुए शिवलिंग को स्नान कराना चाहिए।
इसके अलावा शास्त्रों में यह भी उल्लेख मिलता है कि आज के दिन दूसरे, तीसरे और चौथे प्रहर में व्रती को पूजा, अर्घ्य, जप और कथा सुननी चाहिए। साथ ही स्तोत्र पाठ करना चाहिए और भगवान को प्रणाम करना चाहिए। जबकि एक अन्य मत के अनुसार चंदन के लेप से आरंभ कर सभी उपचारों के साथ शिव पूजा करनी चाहिए और अग्नि में तिल, चावल और घी मिश्रित भात यानि पके हुए चावल की आहुति देनी चाहिए। फिर इस प्रकार हवन के बाद किसी एक साबुत फल की आहुति भी देनी चाहिए। सामान्यतया लोग सूखे नारियल फल की आहुति देते हैं। इसके अलावा आज के दिन शिव कथा का पाठ करना चाहिए और पुनः अर्धरात्रि, रात्रि के तीसरे प्रहर और चौथे प्रहर में भी आहुतियां डालनी चाहिए और फिर अगले दिन सूर्योदय के समय ‘ऊँ नमः शिवाय’ मंत्र का पाठ करना चाहिए।
महाशिवरात्रि 4 प्रहर पूजा मुहूर्त 2025
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 18:43 से 21:47
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – 21:47 से 00:51, फरवरी 27
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 00:51 से 03:55, फरवरी 27
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 03:55 से 06:59, फरवरी 27
