रायपुर:- महिलाएं परिवार में धुरी की तरह काम करती हैं. चाहे घर के बाहर का काम हो फिर या घर के भीतर दोनों जगह महिलाएं बड़ी सहजता से खुद को एडजस्ट कर लेती हैं. उनकी यहीं काबिलयत उनके आगे बढ़ने में बड़ी भूमिका अदा करती है. कई बार परिवार के लोग या रुढिवादी विचारधारा के लोग कहते हैं कि ये काम महिलाओं का नहीं है. महिलाओं का काम घर में रहकर चूल्हा चौका करना है. आज की महिलाएं और बहनें अब पुराने ख्यालात से आगे निकल चुकी हैं. घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर वो काम भी कर रही हैं और घर भी चला रही हैं.
महिलाएं जो बदल रही हैं दूसरों की जिंदगी: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर हम बात कर रहे हैं उन महिलाओं की जिन्होने अपनी मेहतन से अपनी अलग राह बनाई है. घर के बाहर का भी वो काम कर रही हैं और घर की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं. बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के साथ साथ आस पास की जरुरतमंद महिलाओं को भी रोजगार के मौके दे रही
सफलता की कहानी उनकी जुबानी: ईटीवी भारत की टीम ने स्वरोजगार और लघु उद्योग के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाली महिलाओं के साथ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर चर्चा की. चर्चा के दौरान ये जानने की कोशिश की गई कि कैसे एक महिला जब पहली बार रोजगार के लिए बाहर निकलती हैं तो क्या क्या दिक्कतें वो झेलती हैं. कैसे परिवार का कई बार उनको सपोर्ट नहीं मिलता है. कैसे उसके काम में कमियां निकाली जाती हैं. अपने क्षेत्र में सफलता पूर्वक काम करने वाली महिलाओं ने कैसे इन हालातों से पार पाया ये भी जानने की कोशिश की गई.
महिलाओं के मिले प्लेटफॉर्म: सामाजिक कार्यकर्ता का काम करने वाली श्वेता कहती हैं कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई गई हैं. योजनाओं का लाभ सबतक पहुंचे इसकी भी व्यवस्था शासन ने की है. शासन की मदद से आज महिलाएं हस्तशिल्प और माटी कला के जरिए स्वरोजगार कर रही हैं. सामाजिक कार्यकर्ता श्वेता कहती हैं कि बस्तर की महिलाएं आज आयरन आर्ट के जरिए भी कमाई कर रही हैं. शासन को चाहिए कि ऐसी महिलाओं का हौसला बढ़ाने और उनके काम को पहचान दिलाने का प्लेटफॉर्म तैयार किया जाए.
शासन जरुर इन बातों का ख्याल रख रहा है कि कैसे महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जाए. महंगाई के दौर में परिवार की आय का जरिया जरुर बढ़ना चाहिए. पति और पत्नी दोनों मिलकर काम करेंगे तो आय भी बढ़ेगी. महिलाओं में ये काबिलियत है कि वो घर और बाहर दोनों की जिम्मेदारी बखूबी निभा सकती हैं – श्वेता, सामाजिक कार्यकर्ता
मैं 14 सालों से महिलाओं और बच्चियों के लिए काम कर रही हूं. खासकर स्वास्थ्य, शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में हम लोगों की मदद करते हैं. जरुरतमंद महिलाओं को रोजगार कैसे मिले इसके लिए काम करते हैं. महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करते हैं. हमारी कोशिश होती है कि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो सकें – पुष्प लता त्रिपाठी, हर संभव फाउंडेशन
हम बड़ी, पापड़, बिजौरी बनाने का काम करते हैं. दूसरों को बनाना भी सिखाते हैं. घर पर रहकर ये काम आसानी से किया जा सकता है. इस काम में लागत कम और फायदा अच्छा है. स्वरोजगार के लिए इस तरह के काम अच्छे हैं. हमें सबसे ज्यादा दिक्कत ये आती है कि इसको बनाकर बेचें कहां. सरकार से हमारी गुजारिश है कि हमें इसके लिए एक प्लेटफॉर्म दिया जाए जहां हम इनको बेच सकें – पूनम शुक्ला, स्वरोजगार कर रही महिला
”सरकार दे आर्थिक मदद”: सामाजिक कार्यकर्ता श्वेता कहती हैं कि स्वरोजगार के लिए महिलाओं को आसानी से लोन या मदद मिले इसकी व्यवस्था होनी चाहिए. योजना का लाभ कहां से मिलेगा इसकी जानकारी मुहैया करानी चाहिए. मदद कहां से मिलेगी इसकी जानकारी नहीं होने के चलते कई लोग योजनाओं का फायदा नहीं उठा पाते हैं. श्वेता कहती हैं कि सिर्फ 35 किलो अनाज देने भर से किसी समस्या का समाधान नहीं होगा. हर परिवार की आज जरुरतें बढ़ रही हैं. जरुरत के मुताबिक सबको मौके और मदद मिले ये जरुरी है.
”परिवार करे सपोर्ट”: सामाजिक कार्यकर्ता श्वेता कहती हैं कि महिलाओं को आगे बढ़ाने में परिवार का बड़ा रोल होता है. परिवार अगर घर की महिलाओं को आगे नहीं बढ़ाता है तो महिलाओं तरक्की की राह में पिछड़ सकती हैं. परिवार का अगर सपोर्ट होता है तो महिलाएं तेजी से आगे बढ़ती हैं. आज महिलाओं को सिलाई कढ़ाई से लेकर ब्यूटी पार्लर तक का काम आना चाहिए. मुश्किल वक्त में हमारा ये हुनर हमारे काम आता है.
आर्थिक मदद जरुरी: हर संभव फाउंडेशन की सदस्य कहती हैं कि अलग अलग संस्थाओं के जरिए जो मदद मिलती हैं वो सबको मिलें ये जरुरी है. आर्थिक मदद नहीं मिलने से काम करने वाली महिलाओं को दिक्कत होती है. पुष्पलता कहती हैं कि वर्तमान में हमारे पास 400 से ज्यादा महिलाओं की टीम काम कर रही है.
कुछ काम ऐसे होते हैं जो आप घर से शुरु कर सकते हैं. हमें बस जगह मिलनी चाहिए अपने प्रोजेक्ट को शुरु करने के लिए. सरकार को चाहिए की जो प्रोडक्ट हम बना रहे हैं उसे सही समय पर बाजार मिल पाए. एक ऐसा प्लेटफॉर्म हो जहां हम उसे रख सकें, बेच सकें – पूनम शुक्ला, सामाजिक कार्यकर्ता
शासन की तारीफ पर मदद भी जरुरी: सामाजिक कार्यकर्ता और स्वंयसेवी महिला समूह से जुड़ी सभी महिलाएं ये मानती हैं कि सरकार योजनाएं चला रही हैं. महिलाओं के उत्थान और स्वरोजगार के लिए सरकार प्रतिबद्ध है. लेकिन सभी का ये भी कहना है कि सभी को समान अवसर और समान सुविधाएं मिले ऐसी व्यवस्था सरकार को जरुर करनी चाहिए. योजनाएं तभी सफल होंगी जब वो सर्व सुलभ हों, सभी की पहुंच में हों और उसकी जानकारी सामने हो.