रांची:- 3 मार्च को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पेश 1 लाख 45 हजार 400 करोड़ रुपये के बजट पर दो दिनों तक चले वाद-विवाद के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सरकार की ओर से जवाब दिया. उन्होंने विपक्ष और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा. साथ ही सिलसिलेवार तरीके से बताया कि राशि का प्रबंध कैसे होगा. उन्होंने सरयू राय के सुझाव को स्वीकार करते हुए कहा कि अगले वर्ष से बजट की उपलब्धियों को जरूर रखा जाएगा.
राजस्व संग्रहण का लेखा-जोखा
वित्त मंत्री ने विपक्ष पर चुटकी लेते हुए कहा कि कल ही छत्तीसगढ़ में 1 लाख 60 हजार करोड़ का बजट पेश हुआ है. उनसे भी पूछ लें कि कहां से पैसा लाएंगे. रही बात झारखंड की तो यह जानना चाहिए कि केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी होती है. अनुमान के मुताबिक इस मद से 47 हजार 40 करोड़ मिलेंगे. स्टेट का अपना टैक्स होता है. राज्य के स्व कर राजस्व से 35,200 करोड़ की प्राप्ति होगी. राज्य के कर विहीन राजस्व से 25,856 करोड़ प्राप्त होंगे. केंद्र से अनुदान मद में 17,057 करोड़ मिलने का अनुमान है. इस लिहाज से कुल 1 लाख 45 हजार 400 करोड़ हो जाएंगे. राज्य के टैक्स कलेक्शन में वृद्धि हुई है.
रेवेन्यू कलेक्शन की रफ्तार पूर्ववर्ती सरकार से बेहतर
वित्त मंत्री ने कहा कि हर पांचवे वर्ष में झारखंड में लोकसभा और विधानसभा का चुनाव होता है. आदर्श आचार संहिता की वजह से काम बाधित होता है. पूर्ववर्ती एनडीए की सरकार ने 2019-20 के चुनावी वर्ष में 75.75 प्रतिशत का रेवेन्यू कलेक्शन किया था. इसकी तुलना में वर्तमान सरकार ने 2024-25 में जनवरी तक 65.57 प्रतिशत रेवेन्यू कलेक्शन किया है. वित्त मंत्री ने दावा किया कि मार्च समाप्त होने तक रेवेन्यू कलेक्शन 80 प्रतिशत से ज्यादा हो जाएगा. इसलिए विपक्ष को इस तरह का आरोप नहीं लगाना चाहिए कि पैसे कहां से आएंगे.
मंईयां के लिए दूसरे विभागों के नहीं कटे हैं पैसे
वित्त मंत्री ने कहा कि बार-बार विपक्षी साथी कह रहे हैं कि दूसरे विभागों के पैसे काटकर मंईयां सम्मान योजना की तरफ शिफ्ट कर दिया गया. लेकिन यह समझना चाहिए 20 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सबसे ज्यादा पैसे खर्च हुए. लेकिन सोशल सेक्टर को तवज्जो नहीं मिला. वित्त मंत्री ने कहा कि कुछ विभागों में 1 प्रतिशत से भी कम कटौती हुई है. सामाजिक सेक्टर में 8 प्रतिशत का इजाफा किया है.
केंद्र सरकार भीख में नहीं देती है पैसा – वित्त मंत्री
वित्त मंत्री ने कहा कि वित्तीय प्रबंधन के मामले में झारखंड चौथे स्थान पर है. केंद्र सरकार राज्यों को भीख में पैसे नहीं देती है. भारत सरकार अनुमान लगाती है कि इस वर्ष रेवेन्यू में इतना पैसा मिलेगा. नीति आयोग द्वारा दिए गये संवैधानिक प्रावधानों के तहत कैलकुलेशन होता है. उस आधार पर राज्य को हिस्सा मिलता है. मरांडी जी का कहना है कि केंद्र ने डिमांड से ज्यादा पैसा दिया है. लेकिन सच्चाई ये है कि भारत सरकार से 2025 तक अनुदान की राशि मद में 16,961.35 करोड़ रुपये मिलना था लेकिन 5,736.27 करोड़ मिला. शेष 11,225.08 करोड़ रुपये झारखंड को नहीं मिला.
राशि आवंटन में केंद्र का रवैया ठीक नहीं – वित्त मंत्री
वित्त मंत्री ने कहा कि जहां तक जल जीवन मिशन की बात है तो सच ये है कि केंद्र सरकार अपना हिस्सा नहीं दे रही है. जबकि राज्य सरकार ने अपने कोटे के पैसे को रिजर्व रखा है. उन्होंने कहा कि कि अगर बाबूलाल मरांडी कहीं लॉबी में आवाज सुन रहे हों तो उन्हें मालूम होना चाहिए कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेशंन, इंदिरा गांधी दिव्यांग पेंशन, राष्ट्रीय हित परिवार लाभ योजना के तहत 1 अरब 48 करोड़ रुपये पिछले अक्टूबर माह से केंद्र सरकार ने नहीं दिया है. इसी तरह मनरेगा के मेटेरियल मद में 600 करोड़ मिलना था. लेकिन ये पैसा नहीं मिला. मजदूरो के पारिश्रमिक मद का 500 करोड़ रुपये महीनों से बकाया है.
मंईयां नहीं उज्ज्वला योजना थी रेवड़ी – वित्त मंत्री
वित्त मंत्री ने कहा कि विपक्ष के साथी बार-बार पूछते हैं कि 450 रुपये में गैस सिलेंडर कब देंगे. उन्हें बताना चाहिए कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 38.44 लाख करोड़ की लागत से जो पैसे खर्च किए वो चूल्हा काम कर रहा है कि नहीं. हमारी मंईयां सम्मान योजना रेवड़ी नहीं है. ये प्रमाणित हो गया कि उज्ज्वला योजना केंद्र सरकार की फ्रीबीज थी चुनाव जीतने के लिए.
मोमेंटम झारखंड की आड़ में हुई मनमानी
वित्त मंत्री ने कहा कि मोमेंटम झारखंड पर 100 करोड़ से ज्यादा राशि खर्च हुई थी. 210 कंपनियों के साथ एमओयू किया था. 131 कंपनियां पीछे हट गईं थी. 33 कंपनियां बिजली, पानी, जमीन मांगती रह गई. इसकी वजह से लौट गईं. इन्होंने हाथी नहीं उड़ाया बल्कि गरीब जनता को उड़ाने की कोशिश की.
अनुसूचित जाति का विकास नहीं चाहती है भाजपा – वित्त मंत्री
वित्त मंत्री ने कहा कि वर्षों पहले अर्जुन मुंडा की सरकार के दौरान एससी एडवाजरी काउंसिल के गठन को लेकर अधिसूचना जारी हुई थी. नियमावली भी बनी लेकिन यह संचिका में ही फंसी रही. 2014 से 2019 तक तत्कालीन सीएम रघुवर दास से कई बार कहा कि उस काउंसिल को एक्टिवेट करना चाहिए. लेकिन जानबूझकर दबाते रहे. क्योंकि भाजपा कभी नहीं चाहती थी कि अनुसूचित जाति का विकास हो. इस ओर जब सीएम हेमंत सोरेन का ध्यान आकृष्ट कराया तो सहमति बनी कि काउंसिल का गठन होना चाहिए.
बजट पर पक्ष रखते हुए भाजपा विधायक नीरा यादव ने कहा कि बार-बार कहा जाता है कि केंद्र सरकार पर 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया है. जबकि सच ये है कि केंद्र सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं है. यह मामला पीयूसी कंपनियों से जुड़ा है. सरयू राय ने कहा कि झारखंड में वास्तविक बजट पेश नहीं किया जा रहा है. सिर्फ आकार बढ़ा देने से क्या होगा. आप पीपीपी मोड पर जा रहे हैं. सीएसआर का पैसा ले रहे हैं. वहीं विधायक जयराम महतो ने कहा कि बजट में युवाओं के लिए कुछ नहीं दिख रहा है. इस बजट के सामने यहां के युवा हार गये हैं. उन्होंने कहा कि किसानों को उपकरण नहीं जल की ज्यादा जरूरत है.
बजट पर हुई चर्चा में हेमलाल मुर्मू, बाबूलाल मरांडी, रामेश्वर उरांव, सुरेश पासवान, अरुप चटर्जी, अनंत प्रताप देव, समीर कुमार मोहंती, डॉ नीरा यादव, प्रदीप यादव, सरयू राय, जयराम महतो, जनार्दन पासवान, निर्मल महतो, जगत मांझी और राजेश कच्छप ने हिस्सा लिया.