मध्यप्रदेश:- वजन कम करने और डायबिटीज से छुटकारा पाने के लिए दवाईयां लेने वाले सावधान हो जाएं, क्योंकि इससे पेट में लकवा हो सकता है. एक स्टडी में हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ है. जिसमें बताया गया है कि ओजेंपिक या वीगोभी जैसी डायबिटीज और वेट लॉस वाली दवाईयां बेहद हानिकारक हैं.इससे पेट में लकवे का खतरा बढ़ता है, जिसे गैस्ट्रोपैरेसिस कहते हैं. ऐसी कंडीशन में पेट की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और खाना सही तरह पच नहीं पाता है. आइए जानते हैं क्या है यह स्टडी और पेट का लकवा कितना खतरनाक…इन दवाईयों से पेट में हो सकता है लकवारिसर्चर का कहना है कि, वजन घटाने वाली वेगोवी मेडिसिन अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से मंजूरी मिली है, जबकि ओजेंपिक पहले से अप्रूव्ड दवा है. इसका इस्तेमाल टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है.हालांकि, कभी-कभी ओजेंपिक वजन कम करने के लिए भी लिया जाता है. दोनों दवाएं प्रोटीन सेमाग्लूटाइड के इंजेक्शन हैं, जो हार्मोन ग्लूकागन-जैसे पेप्टाइड-1 GLP-1 की तरह ही हैं. ये दवाईयां मतली, उल्टी और दस्त जैसे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं का कारण हैं. क्या है नई स्टडीTOI की खबर के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ कंसास ने इस स्टडी की जानकारी वाशिंगटन में डाइजेस्टिव डिजीज वीक 2024 कांफ्रेंस में दी. दावा किया गया है कि डायबिटीज और मोटापे से पीड़ित 3 लाख लोगों में 1.65 लाख लोगों ने वीगोभी या ओजेंपिक की दवा ली थी. जिसमें पाया गया कि यह दवा पेट को तेजी से खाली कर देता है और इंसुलिन प्रोडक्शन स्लो कर देती है. क्या हैं साइड इफेक्ट्स इस स्टडी को करने वाली टीम के प्रमुख शोधकर्ता और यूनिवर्सिटी ऑफ कंसास में मेडिसीन विभाग में प्रोफेसर डॉ. प्रतीक शर्मा ने इन दवाईयों के फायदे की भी बात की. उन्होंने भले ही इन दवाईयों के फायदे सामने आ चुके हैं लेकिन इसके नुकसान के बारें में भी जानना जरूरी है. बिना डॉक्टर की सलाह के इन दवाईयों को नहीं लेना चाहिए. पेट का लकवा क्या होता हैपेट के लकवे को ही गैस्ट्रोपेरेसिस कहते हैं. इसमें आंत की मांसपेशियां कमजोर हो जाते हैं. आंत का मूवमेंट कमजोर हो जाता है. जिसकी वजह से खाना सही तरह पच नहीं पाता है. इसमें पेट हमेशा भरा-भरा सा लगा रहता है और जल्दी खाली नहीं होता है. इन दवाईयों की वजह से उल्टी, मतली, पेट फूलना, पेट में दर्द, हमेशा पेट भरा रहना, एसिड रिफलेक्स, भूख की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
