नई दिल्ली:- गर्मी के दिनों में खुद को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है. क्योंकि गर्मी की वजह से हमें प्यास ज्यादा लगती है. गर्मी के मौसम में लोग खूब पानी पीते हैं. पहले के जमाने में गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच जहां पहले लोग नींबू पानी, छाछ और शरबत जैसे घरेलू ड्रिंक्स से राहत पाते थे. वहीं आज की युवा पीढ़ी गर्मियों में तेजी से कोल्ड ड्रिंक्स और केमिकल युक्त एनर्जी ड्रिंक्स की ओर रुख कर रही है. स्वस्थ विकल्पों के अलावा, इस बदलती आदत ने विशेषज्ञों को भी चिंतित कर दिया है.
स्वाद के चक्कर में सेहत का सौदा
आज के युवाओं के लिए ताजगी का मतलब ‘ठंडी कोल्ड ड्रिंक’ हो गया है. बाजार में उपलब्ध रंग-बिरंगे कोल्ड ड्रिंक्स, जिनमें चीनी, कार्बन डाइऑक्साइड गैस और केमिकल्स की अधिक मात्रा होती है, अट्रैक्टिव एडवर्टाइजमेंट के माध्यम से युवाओं को अट्रैक्ट कर रहे हैं. जबकि नींबू पानी, जलजीरा, बेल का शरबत जैसे पारंपरिक हेल्दी ऑप्शन अब पीछे छूटते जा रहे हैं. नींबू पानी जैसे घरेलू उपचार न केवल शरीर को ठंडक पहुंचाते हैं, बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करके गर्मी में डिहाइड्रेशन को भी रोकते हैं.
हेल्थ पर पड़ सकता है बुरा असर
आजकल युवाओं में ‘ठंडी’ कोल्ड ड्रिंक्स का चलन किसी फैशन स्टेटमेंट से कम नहीं है. चमकदार बोतलें, आकर्षक विज्ञापन और सोशल मीडिया पर फैली ‘कूल’ इमेज का जादू युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि इस तुरंत ठंडक के पीछे सेहत के लिए लॉन्ग टर्म खतरा छिपा है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कोल्ड ड्रिंक की एक बोतल में इतनी चीनी होती है कि अगर इसे रोजाना पिया जाए तो कैंसर, मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हड्डियों की कमजोरी और लिवर फेलियर जैसे गंभीर खतरे तेजी से बढ़ सकते हैं. वहीं, नींबू पानी, छाछ, बेल का शरबत जैसे देसी विकल्प न सिर्फ प्यास बुझाते हैं बल्कि शरीर को नेचुरल तरीके से हाइड्रेट रखते हैं और इलेक्ट्रोलाइट्स की आपूर्ति भी करते हैं.
युवाओं की जीवनशैली क्यों बदल रही है?
तुरंत ताजगी की चाहत: कोल्ड ड्रिंक्स तुरंत ठंडक का एहसास कराती हैं, जबकि नींबू पानी या छाछ बनाने में समय और थोड़ी मेहनत लगती है.
मार्केटिंग का असर: बड़े ब्रांड युवाओं के बीच कोल्ड ड्रिंक्स को स्टाइल सिंबल के तौर पर बढ़ावा दे रहे हैं.
शहरी जीवनशैली: तेजी से बदलते शहरी परिवेश और फास्ट फूड संस्कृति के कारण पारंपरिक ड्रिंक्स से दूरी बढ़ रही है.
डिजिटल एडवर्टाइजमेंट: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी कोल्ड ड्रिंक्स को ‘कूल’ और ‘ट्रेंडी’ के तौर पर दिखाया जा रहा है, जो युवाओं को प्रभावित कर रहा है.
क्या कहते हैं डॉक्टर?
बलौदाबाजार के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अशोक वर्मा कहते हैं कि गर्मी में शरीर को हाइड्रेशन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. कोल्ड ड्रिंक्स शरीर को पानी नहीं देते, बल्कि डिहाइड्रेशन बढ़ा सकते हैं. नींबू पानी, नारियल पानी, बेल का जूस जैसे नेचुरल ड्रिंक्स सबसे अच्छे विकल्प हैं. युवाओं को सतर्क रहना चाहिए और अपनी दैनिक जीवनशैली में हेल्दी ड्रिंक्स को शामिल करना चाहिए.
डॉक्टरों की चेतावनी: जल्द सुधर जाएं वरना पछताएंगे
बलौदाबाजार जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अशोक वर्मा का कहना है कि गर्मियों में असली जरूरत शरीर में नमी बनाए रखने की है. कोल्ड ड्रिंक्स कुछ देर के लिए ठंडक तो देते हैं, लेकिन शरीर में पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन को बढ़ाते हैं.नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ और बेल का शरबत जैसे घर पर बने ड्रिंक्स न सिर्फ शरीर को नेचुरल तरीके से ठंडा रखते हैं, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं. डॉ. वर्मा ने चेतावनी दी कि अगर युवाओं की यह आदत जल्द नहीं बदली, तो आने वाले समय में डायबिटीज, फैटी लीवर, हड्डियों के रोग और मोटापे जैसी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ सकता है.
