नई दिल्ली :- गर्मियों में ठंडा पानी पीना किसे पसंद नहीं होता? आजकल हर किसी के घर में रेफ्रिजरेटर होता है. लेकिन कुछ साल पहले, पानी को ठंडा करने के लिए मिट्टी के बर्तनों या मटकों का सभी जगहों पर इस्तेमाल होता था. धीरे-धीरे मटके का स्थान रेफ्रिजरेटर ने ले लिया, लेकिन मटके का क्रेज आज भी कायम है. आज के समय में भी बहुत से लोग मटके का पानी पीना पसंद करते हैं. क्योंकि मटके का पानी पीने से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं.
भारत में मिट्टी के बर्तनों में पानी स्टोर करने की सदियों पुरानी परंपरा है. आयुर्वेद में भी इसके अनेक लाभों का उल्लेख है. लेकिन अगर मिट्टी के बर्तनों को कुछ दिनों तक न धोया जाए तो उसमें कीटाणु या फफूंद पनप सकते हैं. इससे आपका स्वास्थ्य खतरे में पड़ सकता है. ऐसे में क्या आप जानते हैं कि मिट्टी के बर्तनों को कितनी बार और कैसे धोना चाहिए? आइये जानते हैं मटका धोने का सही तरीका…
मिस्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, मिट्टी के बर्तनों में स्टोर पानी प्लास्टिक की बोतलों में स्टोर पानी की तुलना में अधिक स्वच्छ और सुरक्षित होता है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय पोषण संस्थान द्वारा प्रकाशित अध्ययनों में भी कहा गया है कि मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करना सबसे सुरक्षित और लाभकारी है.
मिट्टी के बर्तनों को साफ करने के लिए सुझाव
सबसे पहले मिट्टी के बर्तनों से पानी निकाल लें. अब बाहरी हिस्से को स्पंज या मुलायम कपड़े से साफ करें. बर्तन के अंदर के हिस्से को अपने हाथों से साफ करने से बचें क्योंकि ऐसा करने से पानी कम ठंडा होगा.
आप मिट्टी के बर्तन को साफ करने के लिए नींबू का रस, बेकिंग सोडा, सिरका या नमक का भी उपयोग कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले एक चम्मच बेकिंग सोडा, एक चम्मच सिरका और थोड़ा सा नमक डालकर मिश्रण तैयार कर लें. अब मिश्रण को बर्तन में डालें और ब्रश से साफ करें. इससे मिट्टी के बर्तन साफ हो जाएंगे और दुर्गन्ध भी दूर हो जाएगी.
मिट्टी के बर्तनों को साफ करने के लिए एक कटोरी में पानी लें और उसमें नींबू का रस और इसके छिलके डालें. अब इस मिश्रण को कुछ मिनट तक उबलने दें, फिर इस पानी को मिट्टी के बर्तन में डाल दें. अब थोड़ी देर बाद पानी फेंककर. ठंडा पानी डालकर साफ कर लें.
मिट्टी के बर्तनों का पानी हर दिन बदलना अच्छा होता है. क्योंकि अगर आप पानी को दो या तीन दिन तक भरा हुआ छोड़ देंगे तो उसमें कीटाणु पैदा हो सकते हैं.
मिट्टी के बर्तनों में छेद होते हैं. इसलिए इसमें नमी बनी रहती है. यदि इसे ठीक से साफ नहीं किया जाए तो इसमें फफूंद या बैक्टीरिया पनप सकते हैं. मिट्टी के बर्तन को धोने के बाद उसे कुछ मिनटों के लिए धूप में सुखाने के लिए छोड़ दें. ऐसा करने से इस खतरे को कम किया जा सकता है.
मटके का पानी पीने के फायदे
जो लोग बार-बार सर्दी-खांसी से पीड़ित होते हैं, उनके लिए मटके का पानी फायदेमंद हो सकता है. मटके का पीने से भविष्य में संक्रमण से बचाव में मदद मिल सकती है.
मटके का पानी पीने से न केवल पाचन क्रिया बेहतर होती है बल्कि अपच और कब्ज की समस्या से भी छुटकारा मिलता है.
मटके से नियमित रूप से पानी पीने से चयापचय में सुधार होता है.
मटके का पानी पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है.
लू लगना से सुरक्षा करता है.
नियमित रूप से मटके का पानी पीने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है.
मटके का पानी शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए अच्छा है.
मटके का पानी पीने से दिल का दौरा पड़ने की संभावना कम हो जाती है.
त्वचा संबंधी समस्याएं दूर होती हैं और त्वचा चमकदार बनती है.
