नई दिल्ली, 19 जनवरी । कर्ज के भारी बोझ तले दबे कारोबारी विजय माल्या की लंदन स्थित आलीशान घर से बेदखल किए जाने के आदेश पर रोक लगाने की अर्जी ब्रिटिश अदालत ने मंगलवार को खारिज कर दी. स्विस बैंक यूबीएस के साथ लंबे समय से जारी कानूनी विवाद में माल्या के इस घर को खाली कराने का आदेश दिया गया था. माल्या ने इस आदेश के अनुपालन पर रोक लगाने की मांग की थी.
लेकिन लंदन हाई कोर्ट के चांसरी डिविजन के न्यायाधीश मैथ्यू मार्श ने अपने फैसले में कहा कि माल्या परिवार को बकाया राशि के भुगतान के लिए अतिरिक्त समय देने का कोई आधार नहीं है. इसका मतलब है कि माल्या को इस संपत्ति से बेदखल किया जा सकता है. माल्या के लंदन स्थित इस घर में उनकी 95 साल की मां रहती हैं.
बीते संसद सत्र के दौरान लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि बैंकों ने नीरव मोदी, विजय माल्या जैसे ऋण चूककर्ताओं की संपत्तियां बेचकर 13,109 करोड़ रुपये वसूल किए तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने पिछले सात वर्ष में समझौते एवं अन्य उपायों से 5.49 लाख करोड़ रूपये की वसूली की.लोकसभा ने वर्ष 2021-22 की पूरक अनुदान मांगों के दूसरे बैच पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा था, ‘बैंक सुरक्षित हैं, बैंकों में जमाकर्ताओं के पैसे सुरक्षित हैं. अर्थव्यवस्था से जुड़े बड़े विषयों पर ध्यान दिया जा रहा है.’ उन्होंने यह भी कहा कि माल्या की संपत्ति के निस्तारण के बाद वसूले गए 792 करोड़ रुपये बैंकों में जमा करा दिए गए हैं।
माल्या पर 17 भारतीय बैंकों का 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है. वह 2 मार्च, 2016 को भारत छोड़कर ब्रिटेन भाग गया था. भारतीय एजेंसियों ने यूके की कोर्ट से माल्या के प्रत्यर्पण की अपील की और लंबी लड़ाई के बाद यूके की अदालत ने 14 मई को माल्या के भारत प्रत्यर्पण की अपील पर मुहर लगा दी थी. हालांकि, कानूनी दांव-पेचों के चलते उसे अब तक भारत नहीं लाया जा सका है.भारत स्थित ब्रिटेन उच्चायोग ने बताया था कि माल्या के प्रत्यर्पण से पहले कुछ कानूनी जटलिताएं हैं और उसके समाधान की जरूरत है।