नई दिल्ली :– सनातन धर्म मानने वाले लोग परिवार में किसी की मृत्यु होने पर कुछ समय तक चूल्हा नहीं जलाते हैं। इसके अलावा अंतिम संस्कार के बाद पूरे घर की साफ-सफाई भी करते हैं। गरुड़ पुराण में मृत्यु से संबंधित जुड़ी क्रियाओं के बारे में बताया गया है। गरुड़ पुराण भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसमें मृत्यु के बाद की जाने वाली क्रियाओं को विधिवत तरीके से वर्णित किया गया है। ऐसे में आइए इन कारणों को समझते हैं।
16 संस्कारों में से अंतिम संस्कार है मृत्यु
ज्योतिषयों के अनुसार, हिंदू धर्म में 16 संस्कारों का जिक्र है, जिसमें गर्भ संस्कार से लेकर मृत्यु के बाद किया जाने वाला अंतिम संस्कार तक शामिल हैं। गरुण पुराड़ में अंतिम संस्कार और मृत्यु के बाद आत्मा के सफर के बारे में भी बताया गया हैं। इसलिए घर में किसी की मृत्यु होने के बाद गरुड़ पुराण पढ़ा जाता हैं।
मृत्यु के बाद इसलिए घर में नहीं जलाते चूल्हा
गरुड़ पुराण में कहा गया है कि, परिवार में जब किसी की मृत्यु हो जाए तो उसका अंतिम संस्कार होने तक घर में चूल्हा नहीं जलाना चाहिए। अंतिम संस्कार के बाद जब पूरा परिवार स्नान कर ले, उसके बाद ही भोजन पकाना चाहिए।
कई घरों में तो 3 दिन बाद घर की सफाई होने तक घर में भोजन न पकाने की परंपरा है। इसके पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही कारण जिम्मेदार हैं। गरुड़ पुराण के मुताबिक जब तक व्यक्ति का अंतिम संस्कार नहीं होता, तब तक वह अपने परिवार और संसार के मोह में पड़ा रहता हैं। ऐसे में मृतक के प्रति सम्मान दिखाने के लिए घर में भोजन नहीं पकाना चाहिए और न ही खाना चाहिए।
धार्मिक और सामाजिक परंपराएं
यह परंपरा सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी पीढ़ियों से चली आ रही है, और इसका पालन करना परिवार की परंपराओं और समाज के नियमों के अनुसार आवश्यक होता है। इन सभी कारणों से मृत्यु के समय पूजा-पाठ की मनाही होती है और चूल्हा नहीं जलाया जाता। यह शोक और शुद्धिकरण की एक प्रक्रिया मानी जाती है, जो कि मृतक के प्रति सम्मान और परिवार की मानसिक स्थिति को देखते हुए निर्धारित की गई है
