
कांकेर के अंदर के गांवो में अब तुंब यानी लकड़ी का छोटा कुआं पानी पीने के लिए हो रहा है उपयोग….जानिए कैसे करते हैं उपयोग…..
रायपुर:- जैसे ही गर्मी का महीना चालू हो गया वैसे ही जंगल के
अंदरूनी गांव में रहने वाले लोग के लिए पानी पीने की समस्या बढ़ जाती है
अब यहां के लोग पानी पीने के लिए पुराने तरीके का इस्तेमाल कर अपना जीवन गुजारने के लिए मजबूर हैं। इन अंदरूनी गांव में तुंब झिरिया जैसे साधन पानी पीने का सहारा है। प्रदेश में पिछले 3 साल में पहुंचविहीन गांव तक 20,000 से ज्यादा हैंडपंप पहुंचाए गए हैं । लेकिन गांव में वाटर लेवल नीचे आ जाने के कारण यह फेल हो जाता है माला की जिला स्तर पर नहीं की लगातार मॉनिटरिंग चल रही है।
पानी शुद्ध नहीं है तब भी पीने के लिए मजबूर है गांव वाले।
बस्तर के घने जंगलों में हर जरूरत के लिए वनवासियों अपनी सही पुरानी तकनीक इस्तेमाल आप तक करते आ रहे हैं पानी की कमी होने के कारण इन्होंने एक जख्मी से पेड़ों के तने से बने तुंब से पानी पीते हैं।
कांकेर जिले में कोरर से 23 किलोमीटर दूर धनेली पंचायत के गोटूल पारा में तुंब देखे गए हैं यहां बस्ती घाटियों के बीच है। पानी का कमी होने लगी है वहां हैंडपंप में टंकी कुछ भी नहीं है इसलिए ग्रामीणों ने खेत के निचले हिस्से में मोटे से पेड़ के तने का खोल जमीन में गाड़ दिया से रोज इतना पानी जिस पर इकट्ठा हो जाता है कि पूरे बस्ती मान कर लेती है