भारत और मालदीव में तनाव लगातार जारी है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू चीन को खुश करने के लिए भारत से पंगा ले रहे हैं। उन्होंने मालदीव की विदेश नीति को पूरी तरह से चीन के पक्ष में मोड़ दिया है। इतना ही नहीं, वह भारत के खिलाफ लगातार फैसले भी ले रहे हैं। ऐसे में भारत ने हिंद महासागर में मालदीव का काट ढूंढ लिया है। यह देश इंडो-पैसिफिक में भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी कर चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने में मदद करेगा। इतना ही नहीं, भारत इस देश के साथ मिलकर मालदीव को भी अच्छा सबक सिखा सकता है।
यह देश कोई और नहीं, बल्कि मॉरीशस है। हिंद महासागर पर अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण मॉरीशस हमेशा भारत के लिए महत्वपूर्ण रहा है। भारत सरकार भी सुरक्षा और सभी के लिए विकास (SAGAR) नीति के तहत मॉरीशस को एक महत्वपूर्ण देश मानती है। इतना ही नहीं, भारत, मॉरीशस को फॉरवर्ड अफ्रीका के नजरिए से भी देख रहा है।
भारत और मॉरीशस के बीच मजबूत संबंधभारत और मॉरीशस के बीच संबंध स्वतंत्रता के पहले से चले आ रहे हैं। दोनों देशों के बीच मजबूत ऐतिहासिक संबंध भी हैं। अक्टूबर 1901 में महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका की यात्रा के दौरान कुछ देर के लिए मॉरीशस में रुके थे। मॉरीशस का राष्ट्रीय दिवस गांधी के दांडी नमक मार्च की मान्यता में 12 मार्च को मनाया जाता है। मॉरीशस की आबादी में भारतीय मूल की आबादी लगभग 70 प्रतिशत है।
मॉरीशस में प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार मोदी सरकार के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए हुए है। मई 2019 में प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ भी शामिल हुए थे।भारत ने पहले मालदीव को दी थी प्राथमिकतासाझा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों के के कारण भारत मॉरीशस को काफी अहमियत देता है।
फरवरी 2021 में, भारत और मॉरीशस ने समुद्री क्षेत्र जागरूकता और सुरक्षा पर अधिक ध्यान देने के साथ द्विपक्षीय रणनीतिक और रक्षा संबंधों को बढ़ावा देने पर सहमति जताई। भारत ने मॉरीशस को लीज पर एक डोर्नियर विमान और एक उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर ध्रुव की भी पेशकश की थी। लेकिन, जब भारत के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी चीन के खिलाफ द्विपक्षीय संबंधों का लाभ उठाने की बात आई तो भारत ने मालदीव को प्राथमिकता दी। भारत ने मालदीव में अपनी उपस्थिति बढ़ाई, जो बाद में चीन की चाल का भेंट चढ़ गया।
भारत के लिए मॉरीशस क्यों महत्वपूर्ण है?मोहम्मद मुइज्जू सरकार के तहत मालदीव की स्थिति तेजी से वैसी ही होती जा रही है जैसी पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के शासनकाल में थी। मालदीव वर्तमान में पूरी तरह से चीन के प्रभाव में आ गया है। ऐसे में भारत को अब अहसास है कि हिंद महासागर में रणनीतिक बढ़त के लिए सिर्फ एक देश को महत्व देना फायदे का सौदा नहीं होगा। ऐसे में भारत हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी को लेकर मॉरीशस के साथ तेजी से काम कर रहा है।
इसके अलावा भारत को लाल सागर संकट से पैदा हुए खतरों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में भारत राजनयिक कार्ड खेलकर मॉरीशस को तेजी से अपना सहयोगी बना रहा है।भारत ने मालदीव को दे दिया संदेश!भारत ने मालदीव में अपने डॉर्नियर विमान, ऑफशोर पेट्रोल वेसल और हेलीकॉप्टर को चलाने के लिए सैनिकों की एक टुकड़ी को बुलाकर असैन्य टीम को तैनात किया है। इस घटना के 24 घंटे से भी कम समय के अंतर भारत ने 29 फरवरी को मॉरीशस के अगालेगा द्वीप पर एक नई हवाई पट्टी और सेंट जेम्स जेट्टी का उद्घाटन करके एक नया रणनीतिक चैनल खोला है।
ये परियोजनाएं लंबे समय से लंबित थीं, लेकिन भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और सागर के तहत इसे प्राथमिकता दी गई है।पीएम मोदी ने मॉरीशस को सराहागुरुवार को परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब समुद्री सुरक्षा की बात आती है तो भारत और मॉरीशस “प्राकृतिक भागीदार और हितधारक” हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि मॉरीशस भारत के SAGAR विजन में एक प्रमुख भागीदार रहा है और ग्लोबल साउथ का एक देश होने के नाते, मॉरीशस भारत के लिए प्राथमिकता का स्थान रखता है। अगालेगा हवाई पट्टी और सेंट जेम्स जेट्टी भारत को परिचालन कारणों से वहां अपने युद्धपोत भेजने में सक्षम बनाएगी, जिससे चीनी जहाजों की आवाजाही सहित वहां निगरानी गतिविधियां चल सकेंगी।
मॉरीशस में एयरपोर्ट से भारत को क्या फायदासूत्रों के अनुसार, इससे न केवल भारत को खुद को एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शक्ति के रूप में पेश करने में मदद मिलेगी, बल्कि भारतीय नौसेना को भी वहां अपनी ताकत बढ़ाने में मदद मिलेगी।
