रायपुर:- छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक घोटाले में जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा तत्कालीन सरकार के ऊपर से नीचे तक गया था। नार्को टेस्ट में बैंक मैनेजर उमेश सिन्हा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह को 1 करोड़, तत्कालीन गृहमंत्री रामविचार नेताम को 1 करोड़, तत्कालीन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को 2 करोड़, मंत्री राजेश मूणत को 1 करोड़, अमर अग्रवाल को 1 करोड़ और तत्कालीन डीजीपी को 1 करोड़ रुपए घूस देने का खुलासा किया था।
उसने नार्को टेस्ट में बताया है कि बैंक की अध्यक्ष रीता तिवारी के कहने पर उसने लाल, नीले और काले रंग के एडीडास कंपनी के बैग में रकम इन नेताओं के यहां पहुंचाया था। इसलिये रमन सरकार के समय पुलिस ने लैब से नार्को टेस्ट की अधिकृत सीडी लेकर साक्ष्य के रूप में अदालत में जमा ही नहीं किया था ताकि रसूखदार नेताओं को बचाया जा सके।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक घोटाले में अदालत के निर्देश पर की जा रही जांच से इंदिरा बैंक के खातेदारों में न्याय की आस जगी है। इस मामले में 44 उद्योगपति और मामले में संलिप्त लोगों को दी गयी नोटिस का कांग्रेस पार्टी स्वागत करती है। कांग्रेस विपक्ष में रहते हुये भी इंदिरा बैंक के खातेदारों को न्याय दिलाने के लिये खड़ी थी, आज भी कांग्रेस सरकार का उद्देश्य खातेदारों को उनकी रकम वापस दिलाना है।
‘नार्को टेस्ट की सीडी अदालत में नहीं किया पेश’
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष ने कहा कि मैनेजर उमेश सिन्हा के नार्को टेस्ट में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह सहित मंत्रियों की ओर से पैसा लिये जाने की जानकारी पुलिस को शुरू से थी यह और इसीलिये नार्को टेस्ट की सीडी अदालत में प्रस्तुत नही की गई जबकि नार्को टेस्ट अदालत के ही आदेश से करवाया गया था। अदालत ने प्रकरण क्रमांक 614/07 की पेशी दिनांक 4/6/2007 को मुख्य न्या.मजि.रायपुर के आदेश दिनांक 25/01/2007 के अनुसार ही उमेश सिन्हा का नार्को टेस्ट बेंगलुरू में कराया गया।
नार्को टेस्ट की रिपोर्ट पर छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से सरकार के मुखिया और इतने प्रभावशाली मंत्रियों के विषय में स्वतंत्र और निष्पक्ष विवेचना संभव ही नहीं है। नार्को टेस्ट की रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह, बृजमोहन अग्रवाल, राजेश मूणत, रामविचार नेताम, अमर अग्रवाल के पैसे लेने की जानकारी मिली। ऐसी स्थिति में राज्य पुलिस की ओर से राज्य सरकार के तत्कालीन मुखिया डॉ. रमन सिंह और उनके प्रभावशाली मंत्रियों बृजमोहन अग्रवाल, राजेश मूणत, रामविचार नेताम, अमर अग्रवाल के खिलाफ जांच नहीं की गई।
